बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में खाद्य विभाग द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में हुए फर्जीवाड़े के मामले में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। खबरों के अनुसार, सक्षम और संपन्न परिवारों की महिलाओं के नाम पर कूटरचना करके एपीएल (Above Poverty Line) राशन कार्डों को बीपीएल (Below Poverty Line) कार्डों में बदला गया, जिससे सरकारी चावल का अवैध लाभ उठाया गया।
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इस फर्जीवाड़े में खाद्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका जताई गई है। जुलाई 2024 में खाद्य नियंत्रक अनुराग भदौरिया की आईडी से आधी रात को कई राशन कार्ड बनाए गए और सुबह तक अपलोड कर दिए गए, जिससे जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठे।
बेलतरा से बीजेपी विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया और अधिकारियों की गोलमोल जानकारी देने पर आपत्ति जताई। उन्होंने दोषी अधिकारियों के बजाय दूसरे अधिकारी से जांच कराने की मांग की, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने जांच के निर्देश दिए।
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इसके अतिरिक्त, बिलासपुर जिले में खाद्य विभाग के संचालक जितेंद्र शुक्ला ने धान खरीदी केंद्रों और पीडीएस दुकानों का निरीक्षण किया, जहां कई अनियमितताएं पाई गईं। उदाहरण के लिए, बिरकोना धान उपार्जन केंद्र में पूर्व प्रबंधक देवारी लाल यादव के पास 9 किसानों के टोकन मिले, जो संदेहजनक थे।
इन घटनाओं से स्पष्ट है कि बिलासपुर में खाद्य विभाग की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में गंभीर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार व्याप्त हैं। आवश्यक है कि उच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच की जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच सके।




