रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी का हाल भी ग़ज़ब है। एक तरफ़ पुलिस ड्रग्स सिंडिकेट में “कानून का शिकंजा कस रही है” और दूसरी तरफ़ सोशल मीडिया पर पोस्टर घूम रहे हैं। “नो कपड़े, फुल नशा, दिल खोलकर एन्जॉय”। भाई, ये राजधानी है या नेटफ्लिक्स का वयस्क शो?
“न्यूड पार्टी” नाम सुनते ही बुज़ुर्गों का ब्लड प्रेशर बढ़ गया। माँ-बाप सोच में पड़ गए। हम बच्चों को पढ़ने भेजे और वो कहीं ऐसे अश्लील पार्टी का लुत्फ उठाने न चले जाए? रायपुर की गली-कूचों में अब यही चर्चा है। ये शहर जा कहाँ रहा है? कल तक छत्तीसगढ़िया लोग “बासी और चटनी” की बात करते थे, अब “वोदका-वीड” का न्योता पकड़ रहे हैं।
न्यूड पार्टी का पोस्टर हर गली, हर मोबाइल, हर व्हाट्सऐप स्टेटस तक पहुँच गया। लेकिन हमारी पुलिस शायद अभी भी फाइलों में उलझी है। सवाल सीधा है, जनता देख ले, नेता बोल दे, पर पुलिस को क्यों नहीं दिखता? या फिर किसी बड़े “अंकल” की छतरी इन आयोजकों के सिर पर तनी हुई है?
इधर, फेसबुक-इंस्टाग्राम पर ये पोस्टर ऐसे घूम रहे हैं जैसे सबको बुलावा पत्र भेज दिया गया हो। सवाल यह है कि जो प्लेटफ़ॉर्म एक इंच भी गलत फोटो पर रिपोर्ट कर देते हैं, उन्हें यह “नग्न न्योता” क्यों नहीं दिखा? या फिर रायपुर का डेटा भी एल्गोरिद्म ने “एडल्ट पार्टी” समझकर चुप्पी साध ली?
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युवाओं का क्रेज़ और असली खतरा
आजकल का नया शौक “अगर बाकी सब जा रहे हैं तो हम क्यों पीछे रहें”। यही ‘फोमो’ युवाओं को इन पार्टियों की तरफ़ धकेल रहा है। पर असली हकीकत ये है कि इन पार्टियों में मस्ती से ज़्यादा ब्लैकमेलिंग और ड्रग्स का खतरा है। कल फोटो खिंच गई तो भविष्य वहीं दब जाएगा, जैसे बीयर की बोतल खाली होकर कूड़े में फेंकी जाती है।
बाज़ारों और चौक-चौराहों पर लोग कह रहे हैं। “ये रायपुर है या बैंकॉक बनने की तैयारी?”21 सितंबर को अब सबकी नज़रें पुलिस पर हैं। देखें पार्टी होती है या छापा पड़ता है। रायपुर के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है। “ये शहर अपनी पहचान बचाएगा या तमाशे में डूब जाएगा?




