नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के सुदूर आदिवासी अंचल अबूझमाड़ की धरती से निकली 22 वर्षीय खुशबू नाग ने वह कर दिखाया है, जिसकी कल्पना भी कई लोग नहीं कर पाते। सीमित संसाधनों और संघर्षों के बीच पली-बढ़ी खुशबू ने NPC वर्ल्ड वाइड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर भारत और छत्तीसगढ़ का परचम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लहराया है।
नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित इस प्रतिष्ठित बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता में दुनिया भर से खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया, लेकिन खुशबू ने अपने आत्मविश्वास, कठिन परिश्रम और अथक जज़्बे के दम पर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।
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संघर्षों से बनी चैंपियन
खुशबू नाग एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता एक बढ़ई हैं और घर की आर्थिक स्थिति बहुत बेहतर नहीं रही। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बेहबेड़ा स्थित सरस्वती शिशु मंदिर से प्राप्त की और आगे चलकर आत्मानंद कॉलेज, नारायणपुर से B.Sc की पढ़ाई पूरी की। साल 2019 में एक बड़ा दुःख उनके जीवन में आया, जब कैंसर की वजह से उनकी मां का निधन हो गया। इस हादसे ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया, लेकिन उनके भाई ने उन्हें संभाला और मानसिक रूप से मजबूत बनने के लिए जिम जाने की सलाह दी।
फिटनेस से मिली नई दिशा
जैसे ही खुशबू ने जिम में कदम रखा, उन्हें खुद में एक नई ऊर्जा महसूस हुई। धीरे-धीरे उन्होंने फिटनेस को अपना जुनून बना लिया। इस दौरान कोच दिलीप यादव ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें प्रोफेशनल बॉडी बिल्डिंग की दुनिया से परिचित कराया।
लगातार मेहनत और समर्पण के साथ खुशबू ने खुद को तैयार किया और फिर वही मेहनत रंग लाई जब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।
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प्रेरणा बन रहीं हैं क्षेत्र की युवतियों के लिए
आज खुशबू नारायणपुर के सिटी नाइट जिम में बतौर ट्रेनर काम कर रही हैं। वे न सिर्फ खुद को आगे बढ़ा रही हैं, बल्कि आसपास की लड़कियों को भी फिटनेस और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रही हैं।
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आदिवासी बेटियों के लिए मिसाल
खुशबू नाग की यह उपलब्धि आज हर उस लड़की के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखती है। अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र से निकलकर खुशबू ने यह साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हों, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं। छत्तीसगढ़ की इस होनहार बेटी ने पूरे प्रदेश और देश को गर्व का अहसास कराया है। उनके इस ऐतिहासिक कदम के लिए हर ओर से बधाइयों का तांता लगा हुआ है।




