रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया। ईडी ने अदालत से चैतन्य की रिमांड अवधि बढ़ाने का आग्रह किया है। इससे पहले ईडी ने 18 जुलाई को चैतन्य को उनके जन्मदिन के दिन भिलाई स्थित आवास से गिरफ्तार किया था और 5 दिन की रिमांड पर लिया गया था, जो 22 जुलाई को समाप्त हो गई। ईडी ने चैतन्य से बीते पांच दिनों तक लगातार पूछताछ की, जिसमें कई अहम खुलासे सामने आए हैं।
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ईडी का बड़ा खुलासा: 2,500 करोड़ की अवैध कमाई, 16.70 करोड़ चैतन्य को नकद
ईडी के रायपुर जोनल कार्यालय की ओर से 21 जुलाई को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, चैतन्य बघेल को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया गया है। एजेंसी ने यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की है।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि इस कथित घोटाले से राज्य के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा है। ईडी का दावा है कि करीब 2,500 करोड़ रुपये की अवैध कमाई शराब सिंडिकेट से जुड़े लोगों की जेब में पहुंची।
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि चैतन्य बघेल को इस घोटाले से 16.70 करोड़ रुपये नकद प्राप्त हुए, जिसे उन्होंने अपनी रियल एस्टेट कंपनियों के जरिए खपत किया। इस धन का उपयोग उनके निर्माण प्रोजेक्ट में नकद भुगतान, बैकडेटेड बैंक एंट्री और ठेकेदारों को भुगतान करने के लिए किया गया।
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फर्जी लेनदेन के जरिए 5 करोड़ की हेराफेरी का आरोप
ईडी का कहना है कि चैतन्य बघेल ने व्यापारी त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ मिलकर एक योजना बनाई, जिसके तहत ढिल्लों के कर्मचारियों के नाम पर विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट में फ्लैटों की फर्जी खरीददारी दिखाकर लगभग 5 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त की गई। ईडी के मुताबिक, इस लेनदेन से जुड़े बैंकिंग ट्रेल से यह स्पष्ट है कि ढिल्लों के खातों में शराब सिंडिकेट से भुगतान प्राप्त हुए थे।
1000 करोड़ रुपये से अधिक के पीओसी को संभालने का आरोप
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि चैतन्य बघेल ने शराब घोटाले से जुड़े 1000 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति का संचालन किया और इस राशि को कांग्रेस के तत्कालीन कोषाध्यक्ष को सौंपने के लिए अनवर ढेबर और अन्य के साथ समन्वय किया।
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ईडी के अनुसार, इस अवैध कमाई को बघेल परिवार के करीबी सहयोगियों के माध्यम से आगे निवेश के लिए भी प्रयोग किया गया। इस धनराशि के अंतिम उपयोग और इससे जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की जांच अभी जारी है।
क्या है मामला?
छत्तीसगढ़ में हुए शराब घोटाले में सरकारी अधिकारियों, शराब कारोबारी और राजनेताओं की मिलीभगत से अवैध रूप से हजारों करोड़ रुपये का गबन किया गया। ईडी की कार्रवाई इसी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को उजागर करने के लिए की जा रही है।




