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    Home » सावन में करें अपराजिता के फूल से जलाभिषेक, सुख-समृद्धि की है धार्मिक मान्यता

    सावन में करें अपराजिता के फूल से जलाभिषेक, सुख-समृद्धि की है धार्मिक मान्यता

    Khabarwaad News DeskBy Khabarwaad News DeskJuly 18, 2026 धर्म एवं समाज No Comments2 Mins Read

    Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए व्रत, जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अपराजिता का फूल भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि सावन में शिवलिंग पर अपराजिता अर्पित करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    सावन के सोमवार को चढ़ाएं 5 अपराजिता के फूल

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि सावन के प्रत्येक सोमवार शिवलिंग पर अपराजिता के पांच फूल अर्पित किए जाएं तो भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ऐसा करने से जीवन की परेशानियां कम होने और सुख-समृद्धि में वृद्धि होने की मान्यता है। रुद्राभिषेक के दौरान भी अपराजिता के फूलों का उपयोग शुभ माना जाता है।

    तिजोरी में रखें अपराजिता का सूखा फूल

    मान्यता है कि सावन के किसी सोमवार या शुक्रवार शिवलिंग पर अपराजिता का फूल अर्पित करने के बाद मंदिर में चढ़ा हुआ एक अन्य अपराजिता का फूल प्रसाद स्वरूप घर लाकर सुखा लें। इसे लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखने से आर्थिक समृद्धि और धन वृद्धि का आशीर्वाद मिलने की धार्मिक मान्यता है।

    इन सामग्रियों के साथ करें जलाभिषेक

    सावन में जलाभिषेक के लिए तांबे या कांस्य के पात्र में जल लेकर उसमें कच्चा दूध, दही, शहद, अक्षत (साबुत चावल) और अपराजिता का एक फूल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस उपाय से जीवन में उन्नति के मार्ग खुलते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

    धार्मिक मान्यता

    स्थानीय ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ‘अपराजिता’ का अर्थ है जिसे कोई पराजित न कर सके। सावन में भगवान शिव को यह पुष्प अर्पित करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा कुंडली के कुछ दोष शांत होने की मान्यता है।

    रखें इन बातों का ध्यान

    पूजा के दौरान शुद्धता का विशेष ध्यान रखें। स्नान के बाद ही पूजा करें और ताजे व बिना क्षतिग्रस्त अपराजिता के फूल ही अर्पित करें।

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