नई दिल्ली
आंध्र प्रदेश की एसआरएम यूनिवर्सिटी, अमरावती के मनोविज्ञान विभाग द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह सामने आया है कि देश के अधिकांश युवा सफलता की दौड़ और सोशल मीडिया के दबाव में अपने मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी कर रहे हैं।
एशियन जर्नल ऑफ साइकेट्री में प्रकाशित इस अध्ययन में 1,628 कॉलेज छात्रों को शामिल किया गया था। इनमें से दो-तिहाई छात्रों ने सामान्य से अधिक स्तर की चिंता महसूस की, जबकि आधे से ज्यादा छात्रों में अवसाद के लक्षण पाए गए।
यह अध्ययन देश के आठ बड़े शहरों — दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और कोलकाता — के 18 से 29 वर्ष की आयु वाले युवाओं पर किया गया। इनमें लगभग 53% लड़कियां और 47% लड़के शामिल थे।
नतीजे चिंताजनक हैं — करीब 70% युवाओं ने उच्च स्तर की चिंता बताई, 60% में डिप्रेशन के संकेत मिले, जबकि 70% से अधिक प्रतिभागियों ने खुद को भावनात्मक रूप से अस्थिर महसूस किया। वहीं 65% युवाओं ने कहा कि उन्हें अपने भावनाओं और व्यवहार को नियंत्रित करने में कठिनाई होती है।
इसके अलावा, 15% युवाओं ने अपने जीवन से असंतुष्टि जताई और लगभग 8% ने स्वीकार किया कि उनकी मानसिक स्थिति “खराब” स्तर पर है। अध्ययन के अनुसार, यह प्रवृत्ति दिखाती है कि सफलता की चाह और सोशल मीडिया की प्रतिस्पर्धा युवा मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।




