नई दिल्ली। कैलिफोर्निया में इमिग्रेशन नीतियों के खिलाफ हिंसक होते विरोध प्रदर्शनों के बीच ट्रंप प्रशासन ने सोमवार को 700 मरीन सैनिकों की तैनाती की घोषणा की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह तैनाती अस्थायी है और पहले से तैनात नेशनल गार्ड बलों की सहायता के लिए की जा रही है। ट्रंप प्रशासन के इस कदम की कड़ी आलोचना कैलिफोर्निया के नेताओं ने की है, जिन्होंने इसे संघीय सत्ता का दुरुपयोग और राज्य की संप्रभुता पर हमला बताया है। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने प्रेस वार्ता में कहा कि राज्य सरकार ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया है। उन्होंने कहा, “यह तैनाती न केवल गैरवाजिब है बल्कि हमारे संवैधानिक अधिकारों का हनन भी है।”
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एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने जानकारी दी कि सैनिकों की संख्या इस सप्ताह के मध्य तक बढ़कर 2,000 तक पहुंच सकती है। हालांकि, अभी तक पेंटागन ने इन्सुरेक्शन एक्ट को लागू नहीं किया है, जो सेना को कानून व्यवस्था बनाए रखने में सीधे हस्तक्षेप करने की अनुमति देता है। अधिकारी ने यह भी कहा कि “फिलहाल इन्सुरेक्शन एक्ट लागू नहीं किया गया है, लेकिन स्थिति की गंभीरता के आधार पर इसमें बदलाव हो सकता है। रविवार को लॉस एंजेलिस में 300 नेशनल गार्ड सैनिक पहले ही तैनात किए जा चुके हैं। यह तैनाती तब की गई जब विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया और शहर के विभिन्न हिस्सों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं।
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ट्रंप प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है, लेकिन स्थानीय नेताओं और नागरिक संगठनों का आरोप है कि यह कदम राजनीतिक प्रतिशोध और असहमति को दबाने का प्रयास है। स्थिति पर नजर बनाए हुए प्रशासन का कहना है कि जैसे-जैसे हालात बदलेंगे, आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। फिलहाल राज्य और केंद्र सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है।




