बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के DMF घोटाले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने आज पूर्व IAS अधिकारी रानू साहू, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव सौम्या चौरसिया, व्यवसायी मनोज कुमार और बिचौलिया सूर्यकांत तिवारी की स्थायी जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले में उपलब्ध एफआईआर और केस डायरी की सामग्री के आधार पर आरोपियों की संलिप्तता प्रथम दृष्टया स्थापित होती है, विशेषकर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम (PC Act) की धारा 7 और 12 के तहत। इससे यह प्रतीत होता है कि आरोपियों ने आर्थिक अपराध किया है।
हाईकोर्ट ने DMF घोटाले में रानू साहू, सौम्या चौरसिया सहित चार आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की
इससे पहले, मार्च 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने रानू साहू, सौम्या चौरसिया और सूर्यकांत तिवारी को अंतरिम जमानत दी थी, यह मानते हुए कि मामले की जांच में समय लगेगा और इस दौरान आरोपियों को जमानत पर रखा जा सकता है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि आरोपी जांच में हस्तक्षेप करते हैं या साक्ष्य से छेड़छाड़ करते हैं, तो उनकी जमानत रद्द की जा सकती है।
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DMF घोटाले में आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों ने मिलकर खनिज क्षेत्रीय विकास फंड (DMF) से अवैध रूप से 570 करोड़ रुपये की वसूली की। जांच में यह भी सामने आया कि ठेकेदारों ने 15 से 42 प्रतिशत तक कमीशन देकर ठेके हासिल किए। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने इस मामले में कई संपत्तियां जब्त की हैं और 36 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।




