बिलासपुर। रतनपुर क्षेत्र के आठा बीसा तालाब में शुक्रवार सुबह मछली पकड़ने पहुंचे मछुआरों को ऐसा “शिकार” मिला, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। जाल पानी में डाला गया था मछली के लिए, लेकिन जब बाहर निकला तो उसमें करीब सात से आठ फीट लंबा मगरमच्छ फंसा हुआ था। यह नजारा देखते ही तालाब किनारे अफरा-तफरी और कौतूहल दोनों एक साथ फैल गए।
सुबह का वक्त था। रोज की तरह कुछ मछुआरे रतनपुर के आठा बीसा तालाब पहुंचे और जाल डाल दिया। कुछ देर बाद जब जाल खींचना शुरू किया तो उन्हें असामान्य भारीपन महसूस हुआ। मछुआरों को लगा कि आज किस्मत खुल गई है और जाल में कोई बड़ी मछली फंस गई है। यही सोचकर वे उत्साह में भर गए और मिलकर जाल को किनारे खींचने लगे।
लेकिन जैसे-जैसे जाल पानी से ऊपर आने लगा, मछुआरों की उत्सुकता के साथ-साथ आसपास मौजूद लोगों की जिज्ञासा भी बढ़ती गई। तालाब किनारे खड़े लोगों को लगा कि शायद कोई बड़ी मछली हाथ लगी है। देखते ही देखते खबर पूरे इलाके में फैल गई और ग्रामीणों की भीड़ तालाब किनारे जमा होने लगी।
भीड़ की निगाहें जाल पर टिकी थीं। जैसे ही जाल पूरी तरह बाहर आया, वहां मौजूद लोग कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गए। जाल में मछली नहीं, बल्कि करीब सात से आठ फीट लंबा मगरमच्छ छटपटा रहा था। यह दृश्य देखते ही मछुआरों के होश उड़ गए और तालाब किनारे खड़े लोग भी दंग रह गए।
स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सावधानी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद टीम ने मगरमच्छ को जाल से सुरक्षित बाहर निकाला और उसे अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित स्थान पर ले गई।
इस घटना के बाद पूरे इलाके में दिनभर इसी की चर्चा होती रही। मछुआरे भी कहते नजर आए कि वे मछली पकड़ने गए थे, लेकिन जाल में “तालाब का असली मालिक” निकल आया।




