रायपुर। बस्तर जिले को केंद्र नरेंद्र मोदी सरकार ने Left Wing Extremism (LWM) की सूची से बाहर कर दिया है। एलडब्ल्यूई सर्वे वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में, विशेष रूप से नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में, मोबाइल कनेक्टिविटी और विकास परियोजनाओं के लिए किया जाता है। एलडब्ल्यूई सर्वे का उद्देश्य इन क्षेत्रों में मोबाइल सेवाओं की उपलब्धता और विकास परियोजनाओं के प्रभाव का अध्ययन करना है। इससे बाहर जाने का मतलब है कि बस्तर जिला नक्सलियों के लाल आतंक से मुक्त हो गया है।
एल्डब्ल्यूई जिलों की सूची से बाहर होने के बाद अब बस्तर को केंद्र सरकार से मिलने वाली विशेष मदद भी बंद कर दी गई है। बस्तर वो जिला हुआ करता था जहां से अबूझमाड़ और उड़ीसा की एक बड़ी लंबी सीमा लगती थी। यहां कोलेंग, तुलसीडोगरी की पहाड़ियों पर 2 साल पहले तक फोर्स का पहुंचना मुश्किल माना जाता था। दरभा की घाटी में जहां झीरम घाटी हमला हुआ था। वहां पूरी तरह नक्सलियों की सल्तनत थी। यहां अब फोर्स के कैंप खुल चुके है और ये इलाका पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुका है। बस्तर और उड़ीसा के इसी सीमा पर नक्सलियों का गांजे का व्यापार फल फूल रहा था। इस सीमा पर नक्सली आदिवासियों से गांजा उगवाते थे जहां अब अनाज और सब्जियां उगेगी।




