बिलासपुर/बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दहेज प्रताड़ना, मारपीट और यौन उत्पीड़न के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पति और उसके परिवार के पांच सदस्यों के खिलाफ दर्ज एफआईआर तथा उससे संबंधित समस्त आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप सामान्य, अस्पष्ट और ठोस तथ्यों से रहित हैं, जिससे प्रथम दृष्टया कोई अपराध स्थापित नहीं होता।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने 15 मई 2026 को यह फैसला सुनाया।
मामला बलौदाबाजार जिले के राजादेवरी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मेटकुला निवासी श्रीमती गीता साहू द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। गीता साहू का विवाह 25 जून 2023 को ओडिशा के नुआपाड़ा जिले के ग्राम भालेसर निवासी विवेकानंद भोई के साथ हुआ था। विवाह के बाद दोनों कुछ समय तक साथ रहे, लेकिन आपसी मतभेद बढ़ने पर महिला अपने मायके लौट आई।
दस्तावेजों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझाने के लिए समाज और परिजनों की मौजूदगी में नवंबर 2024 में बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में आपसी सहमति से वैवाहिक संबंध समाप्त करने तथा महिला को दहेज का सामान और 8.11 लाख रुपये लौटाने का निर्णय लिया गया था। हालांकि बाद में महिला ने पति, सास, ससुर, ननद और देवर के खिलाफ दहेज प्रताड़ना, 40 लाख रुपये की मांग, मारपीट तथा यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर राजादेवरी थाने में अपराध क्रमांक 19/2025 दर्ज किया गया।
पति पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता टिकेंद्र प्रधान के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में आपराधिक याचिका दायर की गई। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने एफआईआर, आरोपपत्र और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शिकायत में घटनाओं की तिथि, स्थान और आरोपों का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय Dara Lakshmi Narayan & Others vs State of Telangana का हवाला देते हुए कहा कि केवल सामान्य और सामूहिक आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
न्यायालय ने पाया कि उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई अपराध सिद्ध नहीं होता। इसके चलते राजादेवरी थाना में दर्ज एफआईआर क्रमांक 19/2025 तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कसडोल की अदालत में लंबित आपराधिक प्रकरण क्रमांक 1261/2025 की संपूर्ण कार्यवाही को निरस्त कर दिया गया।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्णय दहेज प्रताड़ना से जुड़े मामलों में जांच और अभियोजन की गुणवत्ता को लेकर एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता टिकेंद्र प्रधान ने कहा कि यह फैसला भविष्य में बिना स्पष्ट तथ्यों और ठोस साक्ष्यों के दर्ज मामलों के परीक्षण में मार्गदर्शक साबित होगा।




