नागपुर। बीते कुछ दिनों में देश और दुनिया में हवाई उड़ानों को लेकर लगातार चिंताजनक घटनाएं सामने आ रही हैं। कहीं बम की धमकी, तो कहीं तकनीकी खराबी — पिछले तीन दिनों में कम से कम आठ बड़ी घटनाएं रिपोर्ट की गई हैं, जिससे यात्रियों में डर और असमंजस की स्थिति है।
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12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट क्रैश हो गई थी, जिसमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी समेत 241 लोगों की मौत हुई थी। इस भयावह हादसे के बाद से हवाई सुरक्षा को लेकर एयरलाइंस सतर्क हो गई हैं और छोटी से छोटी तकनीकी खामी को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा।
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15 जून को लंदन से चेन्नई जा रही ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट तकनीकी कारणों से बीच रास्ते लौट आई। वहीं, गुवाहाटी से कोलकाता जा रहे यात्रियों को एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट में दो बार उतारा गया और 18 घंटे की देरी के बाद उड़ान भरी गई।
16 जून को फ्रैंकफर्ट से हैदराबाद आ रही लुफ्थांसा फ्लाइट को बम की धमकी के चलते लौटना पड़ा। वहीं, लखनऊ एयरपोर्ट पर जेद्दा से आए विमान के पहियों से धुआं निकलने पर अफरा-तफरी मच गई। इसी दिन हांगकांग से दिल्ली जा रही एयर इंडिया फ्लाइट को भी तकनीकी कारणों से लौटना पड़ा।
17 जून को कोलकाता में एयर इंडिया की सैन फ्रांसिस्को-मुंबई फ्लाइट रद्द कर दी गई। नागपुर में कोच्चि-दिल्ली इंडिगो फ्लाइट को बम की धमकी के बाद इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। अहमदाबाद से लंदन जा रही फ्लाइट को रद्द किए जाने पर यात्रियों ने नाराजगी जताई।
इन घटनाओं के पीछे एयरलाइंस की ओर से अतिरिक्त सतर्कता को कारण बताया जा रहा है। अहमदाबाद हादसे के बाद जहां भी तकनीकी शंका या सुरक्षा में लूपहोल नजर आता है, फ्लाइट को कैंसिल किया जा रहा है।
हवाई यात्रा पर विश्वास बनाए रखना अब चुनौती बनता जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सतर्कता यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम है।




