Close Menu
KhabarwaadKhabarwaad
    Top Posts

    आरंग जनपद पंचायत का फैसला बेअसर! BEO पर निंदा प्रस्ताव और संकुल समन्वयक को हटाने की अनुशंसा के बाद भी कार्रवाई नहीं

    June 17, 2026

    दहेज प्रताड़ना और यौन उत्पीड़न का मामला हाईकोर्ट ने किया खारिज, पति पक्ष को बड़ी राहत

    June 16, 2026

    कलेक्टर जन-दर्शन में आत्मदाह की कोशिश, पत्नी-बच्चे थे संग… इच्छा मृत्यु की थी मांग

    June 2, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • आरंग जनपद पंचायत का फैसला बेअसर! BEO पर निंदा प्रस्ताव और संकुल समन्वयक को हटाने की अनुशंसा के बाद भी कार्रवाई नहीं
    • दहेज प्रताड़ना और यौन उत्पीड़न का मामला हाईकोर्ट ने किया खारिज, पति पक्ष को बड़ी राहत
    • कलेक्टर जन-दर्शन में आत्मदाह की कोशिश, पत्नी-बच्चे थे संग… इच्छा मृत्यु की थी मांग
    • वीर जवानों के सम्मान के लिए अबूझमाड़ के दुर्गम जंगलों में पहुंचे डॉ. प्रेमा साई महाराज
    • चोरी करते पकड़ाया राजीव पंजियारा, FIR दर्ज, कॉपीराइट सामग्री के अवैध प्रसारण मामले में कभी भी हो सकती है गिरफ्तारी 
    • छत्तीसगढ़ को मिले नए प्रधान मुख्य वन संरक्षक, अरुण कुमार पांडे बने PCCF एवं वन बल प्रमुख
    • नौतपा का कहर: छत्तीसगढ़ में 45 डिग्री के पार पहुंचा पारा, तीन दिन और झुलसाएगी गर्मी
    • बाल सक्षम नीति के बीच ईंट भट्ठे पर हादसा: ट्रैक्टर पलटने से तीन नाबालिग मजदूर घायल, बालश्रम पर फिर उठे सवाल
    Facebook X (Twitter) Instagram
    KhabarwaadKhabarwaad
    Wednesday, June 17
    • Home
    • छत्तीसगढ़
      • रायपुर संभाग
      • दुर्ग संभाग
      • बिलासपुर संभाग
      • बस्तर संभाग
      • सरगुजा संभाग
    • मध्यप्रदेश
    • राष्ट्रीय समाचार
    • अपराध
    • राजनीति
    • धर्म एवं समाज
    • अफसरशाही
    • खेल
    • मनोरंजन
    • स्वास्थ्य
    • राशिफल
    • Auto & Gadget
    KhabarwaadKhabarwaad
    Home » चिल्ड्रन कोर्ट द्वारा नाबालिग को वयस्क मानकर सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को उच्च न्यायालय ने किया निरस्त

    चिल्ड्रन कोर्ट द्वारा नाबालिग को वयस्क मानकर सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को उच्च न्यायालय ने किया निरस्त

    Shrikant BaghmareBy Shrikant BaghmareJune 24, 2025 छत्तीसगढ़ No Comments3 Mins Read
    परिवार के लिए ट्रेन रोके TTE पर 15 साल बाद हाईकोर्ट का फैसला: वेतन कटौती और इंक्रीमेंट रोकने के आदेश खारिज

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में नाबालिग को वयस्क मानकर सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को निरस्त कर दिया है। जस्टिस संजय के अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि आईपीसी की धारा 307 यानी हत्या का प्रयास के तहत अपराध जघन्य अपराध की श्रेणी में नहीं आता। इसमें न्यूनतम 7 साल की सजा का प्रावधान नहीं है।

    हाईकोर्ट ने इस फैसले की कॉपी सभी चिल्ड्रन कोर्ट और बाल कल्याण बोर्ड को भेजने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, कोरबा जिले में एक 17 साल के किशोर के खिलाफ हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया गया था, जिस पर पुलिस ने किशोर न्याय बोर्ड में चालान पेश किया था। बोर्ड ने आरोपी की उम्र 16 से 18 वर्ष के बीच मानते हुए मामले को जघन्य अपराध की श्रेणी में लिया और प्रारंभिक मूल्यांकन के बाद इसे चिल्ड्रन कोर्ट को भेज दिया। चिल्ड्रन कोर्ट ने किशोर को वयस्क मानकर ट्रायल किया। जिसके पश्चात 27 सितंबर 2017 को दिए गए फैसले किशोर को धारा 307 के तहत दोषी करार दिया और उम्रकैद और 2 हजार रुपए का जुर्माना की सजा सुनाई।

    इस फैसले के खिलाफ किशोर ने उच्च न्यायालय में अपील की। जिसमें उसने कहा कि उसे प्रारंभिक मूल्यांकन की रिपोर्ट की कॉपी नहीं दी गई। न ही रिपोर्ट पर उत्तर देने का मौका मिला। इसके अलावा चिल्ड्रन कोर्ट द्वारा भी स्वतंत्र रूप से जांच नहीं की गई और उसे सीधे दोषी करार दे दिया। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के शिल्पा मित्तल मामले का हवाला देते हुए कहा है कि किसी अपराध को तभी जघन्य माना जाएगा, जब उसमें न्यूनतम 7 वर्ष की सजा का प्रावधान हो। आईपीसी की धारा 307 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। लिहाजा, इसे गंभीर अपराध माना जाएगा, न कि जघन्य। जब अपराध गंभीर हो तो किशोर न्याय बोर्ड को ही मुकदमे की सुनवाई करनी चाहिए। चिल्ड्रन कोर्ट को केस भेजना अनुचित था। उच्चन्यायालय ने कहा कि चिल्ड्रन कोर्ट ने किशोर को रिहाई की संभावना के बिना उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह जेजे एक्ट की धारा 21 का सीधा उल्लंघन है। कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि किसी भी किशोर को ऐसी सजा नहीं दी जा सकती जो रिहाई की संभावना को खत्म करे। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि, धारा 307 (हत्या का प्रयास) एक गंभीर अपराध है, पर जघन्य अपराध नहीं। इसमें न्यूनतम 7 वर्ष की सजा अनिवार्य नहीं है, जबकि जघन्य अपराध की परिभाषा में यह आवश्यक तत्व है। इसलिए किशोर के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड को ही करनी थी, न कि चिल्ड्रन कोर्ट को। कोर्ट ने इस फैसले की एक कापी राज्य के सभी बाल न्यायालय और बाल कल्याण बोर्डों को भेजने के निर्देश दिए ताकि भविष्य में इस तरह की प्रक्रियागत चूक दोहराई न जाए।

    • Get News Portal Website @Rs.5999 | WhatsApp on +91 8871571321
    • Get Web Hosting @Rs49 | Visit - HostRT.in
    Share. Facebook Twitter LinkedIn Email Telegram WhatsApp
    Shrikant Baghmare
    • Website

    Keep Reading

    आरंग जनपद पंचायत का फैसला बेअसर! BEO पर निंदा प्रस्ताव और संकुल समन्वयक को हटाने की अनुशंसा के बाद भी कार्रवाई नहीं

    दहेज प्रताड़ना और यौन उत्पीड़न का मामला हाईकोर्ट ने किया खारिज, पति पक्ष को बड़ी राहत

    कलेक्टर जन-दर्शन में आत्मदाह की कोशिश, पत्नी-बच्चे थे संग… इच्छा मृत्यु की थी मांग

    वीर जवानों के सम्मान के लिए अबूझमाड़ के दुर्गम जंगलों में पहुंचे डॉ. प्रेमा साई महाराज

    चोरी करते पकड़ाया राजीव पंजियारा, FIR दर्ज, कॉपीराइट सामग्री के अवैध प्रसारण मामले में कभी भी हो सकती है गिरफ्तारी 

    नौतपा का कहर: छत्तीसगढ़ में 45 डिग्री के पार पहुंचा पारा, तीन दिन और झुलसाएगी गर्मी

    Add A Comment

    Comments are closed.

    Khabarwaad Vacancy

    Pages

    • Home
    • About Us
    • Privacy Policy
    • Contact Us

    Categories

    • छत्तीसगढ़
    • मध्यप्रदेश
    • राष्ट्रीय समाचार
    • अपराध
    •  
    • खेल
    • राजनीति
    • धर्म एवं समाज
    • मनोरंजन

    Owner / Editor Details :- 

    Name :- Shrikant Baghmare

    Contact :- 6264 390 985

    Email :- khabarwaadnews@gmail.com

     

    © 2026 Maintained By RTISPL
    • Home
    • About Us
    • Privacy Policy
    • Terms of service
    • Contact Us

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.