Axiom-4 Mission: भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला आज दोपहर भारतीय समयानुसार करीब 12:00 बजे नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से एक्सियम मिशन-4 के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए रवाना हो गए। वे 41 साल बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय बने हैं। इससे पहले वर्ष 1984 में राकेश शर्मा ने सोवियत संघ के एक मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रा की थी।
मिशन की लॉन्चिंग स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट और उससे जुड़े ड्रैगन कैप्सूल के जरिए की गई। इस मिशन में शुभांशु शुक्ला के साथ तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री भी शामिल हैं। स्पेसक्राफ्ट के 26 जून को शाम 4:30 बजे ISS से जुड़ने की उम्मीद है। कुल उड़ान समय लगभग 28.5 घंटे का होगा।
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Axiom-4 Mission: अंतरिक्ष में पहुंचते ही शुभांशु शुक्ला ने कहा, “व्हाट ए राइड! मेरे कंधे पर लगा तिरंगा बताता है कि मैं आप सभी के साथ हूं।” इस भावुक पल पर भारत में उनके माता-पिता आशा शुक्ला और शंभु दयाल शुक्ला ने बेटे की सफलता पर ताली बजाकर खुशी जताई और भावुक हो उठे।
इस मिशन के पीछे भारत और अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसियों इसरो और नासा के बीच हुआ समझौता है, जिसके तहत शुभांशु शुक्ला को ISS मिशन के लिए चयनित किया गया। यह मिशन भारत के अंतरिक्ष इतिहास के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
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कई बार टल चुका था मिशन, आज हुआ सफल प्रक्षेपण
Axiom-4 Mission: एक्सियम मिशन-4 की लॉन्चिंग पहले 6 बार टल चुकी थी। कभी तकनीकी खामी तो कभी मौसम की वजह से तारीखें बदलती रहीं:
- 29 मई: ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट तैयार नहीं था
- 8 जून: फाल्कन-9 रॉकेट तैयार नहीं था
- 10 जून: खराब मौसम
- 11 जून: ऑक्सीजन लीक
- 19 जून: मौसम और क्रू की सेहत
- 22 जून: ISS के मॉड्यूल के मूल्यांकन की आवश्यकता
आख़िरकार 25 जून को मिशन को हरी झंडी मिली और भारत के लिए एक ऐतिहासिक दिन दर्ज हो गया।




