जशपुर। छत्तीसगढ़ में शराबबंदी अब कितनी जरूरी हो गई है। यह समझने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले में हुई एक महिला की हत्या की घटना काफी है। मुख्यमंत्री साय का गृह जिला जशपुर है और यहां बगीचा ब्लॉक में घटी घटना ने यह साफ़ कर दिया है कि शराब किस तरह से प्रदेश में घरों को तबाह कर रहा है।
दरअसल, 30 जून को ग्राम उबका के तेंदुपारा में रहने वाले 39 वर्षीय जॉन केरकेट्टा ने अपनी पत्नी संपत्ति केरकेट्टा का डंडे से सिर पर वार करने के पश्चात् बेहोशी के हालत में गला दबाकर हत्या कर दी थी। बीस साल पहले दोनों ने प्रेम विवाह कर अपना घर बसाया था और साथ जीने – मरने की कसमें खाई थी। इस बीच कुछ वर्षों तक सब कुछ अच्छा था। लेकिन फिर इस हंसते – खेलते दंपति को शराब के नशे की लत लग गई और इसी लत ने दोनों के रिश्ते को एक खौफनाक अंत दिया, जिसके बाद उनके दो छोटे बच्चों से मां-बाप का साया भी छीन लिया।
क्यों हुई घटना
39 वर्षीय जॉन केरकेट्टा किसानी करके अपना परिवार चलाता था। पति-पत्नी दोनों के शराब की लत की वजह से आर्थिक तंगी थी। घटना वाले दिन उनके घर में खर्च के लिए सिर्फ 1000 रुपये थे। सुबह 8 बजे धान ढोने गया था। दोपहर 1 बजे वापस घर लौटा तो देखा कि उसकी पत्नी घर में नहीं थी, जिससे नाराज होकर वह शराब पीने चले गया। फिर वहां से खाद लेने बगीचा आ गया। बगीचा से शाम 4 बजे लौटा तो देखा उसके घर का दरवाजा अंदर से बंद था। थोड़ी देर बाद मृतिका पूजा केरकेट्टा ने दरवाजा खोला। वह शराब के नशे में थी, जिससे आरोपी नाराज होकर फिर शराब पीने चला गया। शाम 6 बजे जब वह घर लौटा तो देखा कि उसकी पत्नी और भी अधिक शराब के नशे में थी। पति से बिना पूछे ही उसने घर में रखे 1000 में से 500 की शराब पी गई थी। इसी बात को लेकर आरोपी पति अपनी पत्नी से वाद विवाद करने लगा।
ऐसा दिया हत्या को अंजाम
आरोपी जॉन केरकेट्टा के द्वारा आवेश में आकर घर में मृतिका पूजा केरकेट्टा को एक थप्पड़ मारा, जिससे नाराज हो कर मृतिका पूजा केरकेट्टा बाहर से एक डंडा लाई और पति के ऊपर हमला करने लगी। आरोपी ने भी डंडे को छिनकर उसी डंडे से पत्नी के सिर पर हमला कर दिया गया। वह बेहोश होकर जमीन पर गिर गई। इसी दौरान आरोपी ने पत्नी का गला दबाकर उसकी हत्या कर दिया और फरार हो गया।
सरकार के पास आंकड़े नहीं, शायद होती तो शराबबंदी का मुद्दा प्रमुख मानती
शराब की वजह से न जाने कितने घर अब तक तबाह हो चुके हैं। लेकिन, चौंकाने वाली बात तो यह है कि सरकार ने ऐसे राजस्व विरोधी आंकड़े का कोई मसौदा तैयार नहीं किया है और न ही इसकी कोई मंशा रहती है। हालांकि, बतौर राजनीतिक पार्टियां शराबबंदी का मुद्दा राज्य की प्रमुख पार्टियां विपक्ष में रहते अहम मानती है। शराबबंदी के मुद्दे को चुनाव तक खूब भांजती भी है। पर सत्ता में आने के बाद सरकारी राजस्व बढ़ाने की आड़ में करोड़ों रुपयों के घोटाले कर कुर्सी से चली जाती है और शराबबंदी का मुद्दा सिर्फ मुद्दा ही बनकर रह जाता है।




