बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर समेत कई जिलों में हुए करोड़ों रुपये के सोलर स्ट्रीट लाइट घोटाले पर गुरुवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (DB) में हुई इस सुनवाई में शासन की ओर से महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि 6 अगस्त 2024 को विधानसभा की एक जांच समिति गठित की गई है, लेकिन अभी उसकी विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध नहीं हो पाई है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने शासन को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई सितंबर माह के लिए निर्धारित की है।
यह मामला उस समय सामने आया जब समाचार माध्यमों में बस्तर संभाग के सुकमा, बस्तर, कोंडागांव, कांकेर और जांजगीर-चांपा जिलों में सोलर स्ट्रीट लाइट की खरीदी में गड़बड़ी और हेरा-फेरी की खबरें प्रकाशित हुईं। इसके बाद हाईकोर्ट ने इस घोटाले का स्वतः संज्ञान लिया और इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर सुनवाई शुरू की।
क्या है सोलर लाइट घोटाला?
सूत्रों के अनुसार, बस्तर क्षेत्र के 181 गांवों में सोलर लाइटें नहीं लगाई गईं, लेकिन उनके लिए भुगतान कर दिया गया। टेंडर प्रक्रिया में भी भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। यह घोटाला उन इलाकों में हुआ है, जहां पहले से बिजली की सुविधा कमजोर है और सोलर लाइट्स जैसी योजनाएं जनजीवन के लिए बेहद अहम मानी जाती हैं।हाईकोर्ट के सक्रिय रुख और स्वतः संज्ञान लेने के बाद अब प्रदेश की जनता को इस मामले में सख्त कार्रवाई और जवाबदेही की उम्मीद है। दूरस्थ आदिवासी अंचलों में विकास योजनाओं के नाम पर हुए इस घोटाले ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।सरकार को अब जांच समिति की विस्तृत रिपोर्ट सितंबर से पहले पेश करनी होगी। हाईकोर्ट का रुख देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि यदि लापरवाही या दोष सिद्ध होती है तो कड़ी कार्रवाई तय है।




