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    Home » सुनीता विलियम्स की तरह अंतरिक्ष में फंस सकते हैं शुभांशु शुक्ला? जानिए क्यों टली धरती पर वापसी

    सुनीता विलियम्स की तरह अंतरिक्ष में फंस सकते हैं शुभांशु शुक्ला? जानिए क्यों टली धरती पर वापसी

    Shrikant BaghmareBy Shrikant BaghmareJuly 10, 2025 trending No Comments4 Mins Read
    सुनीता विलियम्स की तरह अंतरिक्ष में फंस सकते हैं शुभांशु शुक्ला

    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 14 दिन का मिशन पूरा करने के बाद Axiom-4 मिशन का चार सदस्यीय दल फिलहाल अंतरिक्ष में ही रहेगा। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने बुधवार को जानकारी दी कि खराब मौसम और तकनीकी कारणों के चलते मिशन की वापसी को 14 जुलाई तक के लिए टाल दिया गया है।

    Axiom-4 मिशन की अगुवाई अनुभवी अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन कर रही हैं। उनके साथ भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के स्लावोश उज्नांस्की-विस्निएव्स्की और हंगरी के टिबोर कपु भी ISS पर मौजूद हैं। यह मिशन 27 जून को शुरू हुआ था और पहले से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 10 जुलाई को इसकी वापसी होनी थी।

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    खराब मौसम बना सबसे बड़ा रोड़ा
    Axiom-4 का चालक दल SpaceX के ड्रैगन कैप्सूल ‘ग्रेस’ में सवार होकर धरती पर लौटेगा। यह कैप्सूल फ्लोरिडा के तट के पास अटलांटिक महासागर या मैक्सिको की खाड़ी में सॉफ्ट स्प्लैशडाउन करेगा। लेकिन वापसी से पहले समुद्र में मौसम की स्थिति पूरी तरह अनुकूल होनी जरूरी है।

    NASA और ESA के संयुक्त बयान के अनुसार, वर्तमान में उस क्षेत्र में तेज हवाओं, बारिश और संभावित तूफान जैसी स्थितियां बनी हुई हैं। ऐसी स्थिति में स्प्लैशडाउन को आगे बढ़ाना अनिवार्य हो जाता है, जिससे मिशन की वापसी में देरी हो रही है।

    ISS में तकनीकी समस्या ने बढ़ाई चिंता
    मौसम के साथ-साथ ISS में हाल ही में रूसी मॉड्यूल ‘ज़व्ज़ेदा’ में हवा के रिसाव (pressure leak) की समस्या सामने आई थी। हालांकि NASA और रूस की अंतरिक्ष एजेंसी Roscosmos ने इसे ठीक करने का दावा किया था, लेकिन बाद में एक नए रिसाव का संकेत मिला है। सुरक्षा कारणों से इस समस्या की पूरी जांच आवश्यक है, जिसके चलते किसी भी क्रू को वापस भेजने में अतिरिक्त समय लग रहा है।

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    रिएंट्री एक संवेदनशील और जटिल प्रक्रिया
    अंतरिक्ष से पृथ्वी पर वापसी, जिसे रिएंट्री कहा जाता है, अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया होती है। सबसे पहले ड्रैगन कैप्सूल को ISS से अनडॉक किया जाता है। इसके बाद यह हजारों किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, जहां तापमान हजारों डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इस गर्मी से बचाव के लिए कैप्सूल में विशेष हीट शील्ड लगाए गए होते हैं। अंत में, बड़े पैराशूट की मदद से यह समुद्र में सॉफ्ट लैंडिंग करता है। इस पूरी प्रक्रिया में मौसम का अत्यधिक महत्व होता है, क्योंकि तेज लहरें या तूफानी हवाएं लैंडिंग को खतरनाक बना सकती हैं।

    ISRO ने नहीं दी कोई आधिकारिक जानकारी
    मिशन में भारतीय पायलट की भागीदारी के बावजूद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अभी तक मिशन की वापसी को लेकर कोई आधिकारिक वक्तव्य जारी नहीं किया है। हालांकि ESA और NASA की जानकारी के अनुसार, मौजूदा हालात को देखते हुए वापसी 14 जुलाई के बाद ही संभव नजर आ रही है।

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    क्या है ‘लॉन्च विंडो’ और क्यों है यह जरूरी?
    ‘लॉन्च विंडो’ वह सटीक समय होता है जब ISS और ड्रैगन कैप्सूल एक-दूसरे की कक्षा में सही तालमेल में होते हैं। यदि मौसम या तकनीकी कारणों से यह समय चूक जाए, तो अगली लॉन्च विंडो का इंतजार करना पड़ता है। यह विंडो कुछ घंटों बाद भी मिल सकती है, या फिर कई दिन लग सकते हैं। यही कारण है कि अंतरिक्ष मिशनों की टाइमिंग में ज़रा सी भी बाधा पूरे कार्यक्रम को प्रभावित कर सकती है।

    नजरें अब 14 जुलाई पर टिकीं
    अब सभी की निगाहें 14 जुलाई पर टिकी हैं, जब अगली उपयुक्त लॉन्च विंडो और बेहतर मौसम की स्थिति मिलने की संभावना है। तब तक Axiom-4 मिशन का दल अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर ही रहेगा और निर्धारित वैज्ञानिक गतिविधियों को अंजाम देता रहेगा।

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