नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने फिलहाल इस प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, जिससे चुनाव आयोग को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने कहा कि मामला मतदान के अधिकार और लोकतंत्र की मूल भावना से जुड़ा है, इसलिए इस पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत है।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि 24 जून 2024 को चुनाव आयोग द्वारा जारी निर्देशों को चुनौती देने वाली याचिकाएं संवैधानिक और कानूनी सवाल उठाती हैं, लेकिन इस चरण में SIR प्रक्रिया पर रोक लगाना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता इस प्रक्रिया को “संविधान और रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960” के खिलाफ बता रहे हैं, परंतु आयोग ने भरोसा दिलाया है कि सारी प्रक्रिया पारदर्शी और विधिसम्मत ढंग से संचालित की जा रही है।
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चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील ने बताया कि इस तरह का इंटेंसिव रिवीजन पहले 2003 में भी किया गया था, और इस बार भी सभी जरूरी प्रक्रियाएं अपनाई जा रही हैं। कोर्ट ने माना कि मामला संवेदनशील और व्यापक जनहित से जुड़ा है, अतः इसे एक विस्तृत सुनवाई की जरूरत है।
दस्तावेजों को लेकर कोर्ट का सुझाव
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को सुझाव दिया कि वह आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) और राशन कार्ड जैसे प्रामाणिक दस्तावेजों को पहचान के लिए स्वीकार करने पर विचार करे।
कोर्ट ने कहा, “हमें बताया गया है कि चुनाव आयोग दस्तावेजों की संख्या को लेकर सख्ती नहीं बरत रहा है। हालांकि, हमारा सुझाव है कि इन तीन प्रमुख दस्तावेजों को भी मान्यता दी जाए, ताकि अधिकतम पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल किया जा सके।”
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नागरिकता को लेकर तर्क और बहस
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करने का अधिकार केंद्र सरकार को है, न कि किसी स्थानीय अधिकारी या बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को। उन्होंने कहा, “यह गंभीर मामला है, जहां BLO को यह अधिकार दे दिया गया है कि वह तय करे कि कोई व्यक्ति नागरिक है या नहीं।”
इसके जवाब में चुनाव आयोग के वकील ने स्पष्ट किया कि आयोग का उद्देश्य नागरिकता तय करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन करने वाला व्यक्ति सही है या नहीं। आयोग ने कहा कि उन्होंने 11 दस्तावेजों की सूची तय की है, लेकिन इससे बाहर के वैध दस्तावेजों को भी विचार में लिया जा सकता है।
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अगली सुनवाई 28 जुलाई को
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई 2025 को होगी। उससे पहले सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR)?
‘SIR’ यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन, चुनाव आयोग द्वारा संचालित एक विशेष प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची को अपडेट किया जाता है। इसमें नए मतदाताओं को जोड़ा जाता है, मृत या स्थानांतरित लोगों के नाम हटाए जाते हैं और त्रुटियों को सुधारा जाता है। यह प्रक्रिया चुनाव से पहले मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिहीन बनाने के लिए की जाती है।




