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    Home » छत्तीसगढ़ ने सुधारी 24 साल पुरानी पेंशन गड़बड़ी, मध्यप्रदेश से वसूले 1685 करोड़ रुपए, डिजिटाइजेशन और तकनीक से मिला फायदा

    छत्तीसगढ़ ने सुधारी 24 साल पुरानी पेंशन गड़बड़ी, मध्यप्रदेश से वसूले 1685 करोड़ रुपए, डिजिटाइजेशन और तकनीक से मिला फायदा

    Shrikant BaghmareBy Shrikant BaghmareAugust 1, 2025 trending No Comments4 Mins Read
    छत्तीसगढ़ ने सुधारी 24 साल पुरानी पेंशन गड़बड़ी, मध्यप्रदेश से वसूले 1685 करोड़ रुपए

    रायपुर। वर्ष 2000 में जब मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य बना, तो कर्मचारियों का बंटवारा भी हुआ। तय हुआ कि विभाजन से पहले मध्यप्रदेश में की गई सेवा की पेंशन का 73.38% भार मध्यप्रदेश उठाएगा और शेष 26.62% छत्तीसगढ़। लेकिन बीते 24 वर्षों में मध्यप्रदेश ने अपने हिस्से की पेंशन राशि छत्तीसगढ़ को कभी भेजी ही नहीं।

    अब यह गलती तब सामने आई जब छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी के निर्देश पर पेंशन रिकॉर्ड का डिजिटाइजेशन शुरू हुआ। जांच में पता चला कि बैंक सीधे पेंशनर्स को पूरी राशि छत्तीसगढ़ सरकार से प्राप्त करके भेज रहे थे, जबकि मध्यप्रदेश से हिस्सेदारी नहीं आ रही थी।

    इस खुलासे के बाद छत्तीसगढ़ ने 2024-25 के लिए मध्यप्रदेश से 1685 करोड़ रुपए की मांग की, जो हाल ही में जमा भी हो गई है। पेंशन संचालनालय के मुताबिक अब हर साल 150 से 200 करोड़ रुपए की स्थायी बचत छत्तीसगढ़ को होगी।

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    कैसे हुई गलती की पहचान
    वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भाजपा सरकार बनने के बाद विभागीय समीक्षा में पेंशन रिकॉर्ड को डिजिटल करने के निर्देश दिए। इस प्रक्रिया के दौरान जब पुराने पीपीओ (पेंशन पेमेंट ऑर्डर) स्कैन किए गए, तो पहली बार यह सामने आया कि मध्यप्रदेश कभी भी अपने हिस्से की राशि नहीं दे रहा था।

    छत्तीसगढ़ सरकार पूरी पेंशन राशि बैंकों को भेजती रही और बैंक सीधे पेंशनर्स को ट्रांसफर करते रहे। चूंकि बैंकों के सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर भोपाल में थे, इसलिए छत्तीसगढ़ की पेंशन में मध्यप्रदेश की भागीदारी की कोई निगरानी नहीं हो सकी। जब रायपुर में 2022 में पेंशन सेंटर्स शिफ्ट हुए और रिकॉर्ड मांगे गए, तब बैंकों के पास कोई स्पष्ट डेटा नहीं मिला। यहीं से जांच शुरू हुई और बड़ी चूक सामने आई।

    तकनीक और एआई से हुआ समाधान
    पेंशन संचालनालय के संचालक रितेश अग्रवाल ने बताया कि करीब 1.42 लाख पुराने पीपीओ को स्कैन कर डिजिटल किया गया। इसके बाद दोनों राज्यों के बीच पेंशन की तय हिस्सेदारी के अनुसार लेन-देन का एकीकृत डेटाबेस तैयार किया गया। डेटा को समझने के लिए AI तकनीक का उपयोग किया गया। फिर सहायक खाता बही तैयार कर महालेखाकार कार्यालयों से प्रमाणित करवाई गई। अब प्रतिमाह मध्यप्रदेश को उसके हिस्से की राशि का डिमांड भेजा जा रहा है। अप्रैल से जून तक सिर्फ तीन महीने में ही छत्तीसगढ़ को 600 करोड़ रुपए की बचत हुई है।

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    2040 तक रिटायर होंगे 51000 कर्मचारी
    इस वक्त छत्तीसगढ़ में करीब 1.42 लाख पेंशनर्स हैं। इनमें से 51000 कर्मचारी वे हैं जो कभी मध्यप्रदेश में सेवा दे चुके हैं और 2040 तक रिटायर हो जाएंगे। इनकी पेंशन में भी मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी सुनिश्चित करनी जरूरी है।

    रामप्रकाश के केस से समझें पूरी तस्वीर
    रामप्रकाश नामक कर्मचारी ने कुल 30 वर्षों की सेवा में से 20 साल मध्यप्रदेश और 10 साल छत्तीसगढ़ में बिताए। रिटायर होने पर उनकी पेंशन 30 हजार रुपए तय हुई।
    इसमें से 21,996 रुपए मध्यप्रदेश और 8,004 रुपए छत्तीसगढ़ को देना था। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने ही पूरी राशि बैंक को भेजी और मध्यप्रदेश से कोई अंशदान नहीं मिला।

    क्या बोले वित्त मंत्री
    वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि, छत्तीसगढ़ ने यह सिद्ध कर दिया कि इच्छाशक्ति, डेटा और तकनीक के सही उपयोग से इतिहास भी सुधारा जा सकता है। 1685 करोड़ रुपए वापस लाना केवल वित्तीय उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रणाली की पारदर्शिता का उदाहरण है।

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    बीते सालों में कैसे बदली व्यवस्था

    • 1986: मध्यप्रदेश में पेंशन संचालनालय की स्थापना।
    • 1991-92: संचालनालय ने महालेखाकार से पेंशन वितरण का जिम्मा लिया।
    • 1996: रायपुर, बिलासपुर में संयुक्त संचालक नियुक्त हुए।
    • 2000: राज्य विभाजन के बाद दुर्ग, सरगुजा, बस्तर में जेडी कार्यालय खुले।
    • 2011: बैंकों में सेंट्रलाइज पेंशन सिस्टम लागू।
    • 2018: आभार पोर्टल की शुरुआत, सभी प्रकरण ऑनलाइन।
    • 2022: बैंकों के पेंशन सेंटर्स रायपुर शिफ्ट हुए।
    • 2024: तकनीकी गड़बड़ी का खुलासा, 1685 करोड़ की वसूली।

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