महासमुंद: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के खैरझिटी गांव में करणी कृपा पावर प्राइवेट लिमिटेड के कथित अवैध संचालन और उससे होने वाले फसल नुकसान को लेकर किसानों में गहरा आक्रोश फैल गया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी विनय कुमार लंगेह द्वारा गठित कृषि विभाग की जांच टीम ने स्थल निरीक्षण के बाद पावर प्लांट से निकलने वाले काले धूल (ब्लैक डस्ट) से फसलों को नुकसान की शिकायत को सही पाया। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सक्रिय सदस्य और किसान नेता अशवंत तुषार साहू ने कलेक्टर से तत्काल प्लांट को बंद करने की मांग की है।
शिकायत और जांच
5 अगस्त 2025 को खैरझिटी के किसानों ने जिला कलेक्टर के जनदर्शन कार्यक्रम में शिकायत दर्ज की थी कि करणी कृपा पावर प्लांट से निकलने वाला धुआं और काला धूल उनकी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। किसानों का आरोप है कि फसल पकने के समय धान की बाली काली पड़ जाती है, जिसके कारण सरकारी समितियां धान खरीदने से इनकार कर देती हैं।
कलेक्टर के निर्देश पर कृषि विभाग की टीम ने खैरझिटी में स्थल निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि खेतों में एक से डेढ़ फीट तक काला धूल जमा है, जो फसलों को नष्ट कर रहा है। जांच टीम ने पंचनामा तैयार कर अपनी रिपोर्ट में शिकायत को सही ठहराया।
किसानों की मांग
किसान नेता अशवंत तुषार साहू ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “जांच में शिकायत सही पाई गई है, फिर भी शासन-प्रशासन केवल नोटिस जारी करने का खेल खेल रहा है। जनहित में इस अवैध पावर प्लांट को तत्काल बंद किया जाना चाहिए। आखिर यह प्लांट किसके संरक्षण में चल रहा है?” किसानों ने मांग की है कि प्लांट के संचालन से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की जाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
पहले भी उठ चुका है मुद्दा
यह पहली बार नहीं है जब करणी कृपा पावर प्लांट के खिलाफ आवाज उठी है। इससे पहले 13 फरवरी 2025 को छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा ने मुंगई माता मंदिर (बावनकेरा) में भंडारा आयोजित कर प्लांट के अवैध संचालन, औद्योगिक प्रदूषण, और शासकीय व निजी भूमि पर कब्जे के खिलाफ आंदोलन की घोषणा की थी। किसानों ने उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन कराने और शासकीय, सिंचाई विभाग, नेशनल हाईवे, और आदिवासी भूमि को कब्जा मुक्त करने की मांग की थी।
19 मई 2025 को श्रीराम जानकी मंदिर, खैरझिटी में किसानों की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी, जहां विश्व धरोहर सिरपुर को बचाने और अवैध मिनी स्टील प्लांट, स्पंज आयरन प्लांट, और सड़े-गले टायरों से तेल बनाने की इकाई को बंद करने की मांग उठी थी।




