रायपुर/छत्तीसगढ़ में इस मानसून सीज़न में बारिश का वितरण अनियमित रहा है, जिससे खरीफ की बेमौसमी शुरुआत, विशेषकर धान की फसल, संकट में दिख रही है। कृषि के मुख्य ज़िलों में बारिश की कमी और तापमान असंतुलन से किसानों में बेचैनी की लकीर गहरी हो रही है।
बारिश का हाल — जिलेवार आंकड़े
राज्य के कृषि विभाग के अनुसार, 11 अगस्त तक छत्तीसगढ़ में औसत बारिश 717.2 मिमी होनी चाहिए थी, लेकिन इस साल अब तक केवल 537.6 मिमी बारिश हुई है।
| जिला | सामान्य औसत (मिमी) | अब तक हुई (मिमी) | कमी (%) |
| बलौदाबाजार | 850 | 557.6 | -34% |
| महासमुंद | 880 | 602 | -31% |
| दुर्ग | 840 | 615 | -27% |
| राजनांदगांव | 900 | 670 | -26% |
| कोरबा | 1050 | 720 | -31% |
| बीजापुर | 1200 | 890 | -26% |
(कृषि मौसम विज्ञान केंद्र, रायपुर के आंकड़ों के अनुसार)
खेती पर सीधा असर
धान की बियासी का समय निकल रहा है, लेकिन अब तक राज्य में सिर्फ 42% ही बियासी हो पाई है। बलौदाबाजार, महासमुंद और दुर्ग जैसे जिलों में यह आंकड़ा 35-40% के बीच है।
- धान के पौधे पीले पड़ना शुरू — कई जगह धूप और पानी की कमी से धान के पौधे मुरझाने लगे हैं।
- खाद डालने में देरी — बारिश नहीं होने से किसान समय पर खाद का छिड़काव नहीं कर पा रहे।
- नहरों पर दबाव — सिंचाई नहरों से पानी छोड़ने की मांग बढ़ रही है, लेकिन जलाशयों का जलस्तर भी सामान्य से नीचे है।
किसानों की चिंता
बलौदाबाजार के किसान रामनाथ साहू कहते हैं, “अगर एक हफ्ते में बारिश नहीं हुई, तो आधी फसल खराब हो जाएगी। बीज, खाद, मजदूरी—सब पर कर्ज लिया है, अब लौटाने का भरोसा नहीं बचा।”
महासमुंद की महिला किसान कांति वर्मा बताती हैं, “पिछले साल इसी समय खेत पानी से लबालब थे, अब मिट्टी फटने लगी है। धान की जड़ सूख जाएगी तो कुछ नहीं बच पाएगा।”
कृषि वैज्ञानिकों की चेतावनी
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. मनोज पटेल का कहना है—
“धान की इस अवस्था में लगातार 10-12 दिन पानी रहना जरूरी है। अगर बारिश में और देरी हुई तो उत्पादन में 30-40% तक की गिरावट हो सकती है। किसानों को अभी वैकल्पिक फसल या अल्पावधि धान किस्मों पर विचार करना चाहिए।”
सरकार की तैयारी
राज्य सरकार ने खरीफ संकट से निपटने के लिए कुछ कदम घोषित किए हैं:
- नहरों से पानी छोड़ने की योजना — जहां जलाशयों में पर्याप्त पानी है, वहां चरणबद्ध तरीके से पानी छोड़ा जाएगा।
- वैकल्पिक बीज वितरण — देर से बोई जाने वाली किस्मों के बीज मुफ्त में दिए जाएंगे।
- आपदा राहत प्रावधान — नुकसान का आंकलन कर प्रभावित किसानों को फसल बीमा और विशेष राहत पैकेज दिया जाएगा।
- कृषि सलाह केंद्र सक्रिय — गांव-गांव में कृषि सहायकों को किसानों को जल-संरक्षण तकनीक और पोषण प्रबंधन के बारे में जानकारी देने के निर्देश।
कृषि मंत्री ने बयान में कहा है, “सरकार किसानों के साथ खड़ी है। हर संभव प्रयास होगा कि इस संकट से उन्हें बचाया जा सके।”
बारिश की कमी सिर्फ फसल का संकट नहीं, बल्कि गांव की पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है। धान के खराब होने का मतलब है—किसानों की आय में भारी गिरावट, मजदूरों के लिए काम की कमी, और आने वाले महीनों में खाद्यान्न संकट की आशंका। ग्रामीणों के चेहरों पर चिंता साफ देखी जा सकती है—खेत की दरारें जैसे उनके दिल की दरारें बन गई हों।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस समय दो चीजें सबसे जरूरी हैं—तुरंत बारिश या कृत्रिम सिंचाई के इंतजाम, और किसानों को समय पर वैकल्पिक फसल योजना देना। अगर मौसम ने जल्द साथ नहीं दिया, तो यह खरीफ सीजन छत्तीसगढ़ के लिए भारी नुकसान वाला साबित होगा।




