रायपुर। छत्तीसगढ़ की धरती पर इन दिनों आसमान मौत बनकर बरस रहा है। नदियां उफान पर हैं, गांव कस्बों की सांसें थमी हुई हैं और कई घरों में चिराग हमेशा के लिए बुझ गए।
बिलासपुर जिले के खोंगसरा में सोमवार को जो हुआ, उसने पूरे प्रदेश को हिला दिया। मरही माता मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे ध्रुव परिवार के चार मासूम बच्चे अचानक आए बाढ़ के पानी में बह गए। चीख-पुकार, दौड़भाग, मदद की गुहार—सब बेकार। पलभर में तीन बच्चों की हंसी लहरों के नीचे दफन हो गई।
गौरी (13), मुस्कान (13) और नितांश (5)… ये तीन नाम अब सिर्फ यादों में रह जाएंगे। चौथा बच्चा अब भी लापता है। घर का आंगन जहां बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, अब मातम का सन्नाटा पसरा है। गांव का हर शख्स ध्रुव परिवार के आंसुओं में डूबा है।
बीजापुर का दर्द
इधर, बीजापुर के नारायणपुर इलाके में भी नदी ने कहर बरपाया। नाव में सवार 11 लोग नदी पार कर रहे थे, तभी तेज बहाव ने नाव को पलट दिया। नौ लोग तो किसी तरह बच निकले, लेकिन दो नन्हीं बच्चियां नदी की लहरों में समा गईं। गांव के किनारे पर बैठी माएं अब भी उस दिशा में देख रही हैं, जहां उनकी बेटियां बह गईं—उन्हें उम्मीद है कि शायद कोई चमत्कार हो जाए।
पचपेड़ी का हादसा
पचपेड़ी के टांगर गांव में 12 साल का बच्चा रोज़ की तरह साइकिल से एनीकट पार कर रहा था। लेकिन उस दिन नदी ने रास्ता रोक लिया। तेज बहाव ने उसे साइकिल समेत निगल लिया। कुछ पल की जद्दोजहद, फिर बस पानी की गूंज रह गई। परिजनों की आंखें अंधेरे में उस बच्चे को ढूंढती रह गईं।
आपदा का दर्द, प्रशासन की अपील
लगातार बारिश से नदियां रौद्र रूप में हैं। SDRF और पुलिस टीमें दिन-रात रेस्क्यू कर रही हैं, लेकिन हादसे रुक नहीं रहे। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी-नालों के पास जाने से बचें।
लेकिन सवाल यही है—जिन घरों ने अपने बच्चों को खो दिया, उनके लिए सतर्कता की ये अपील अब क्या मायने रखती है? उनकी दुनिया तो उसी लहर में बह गई, जहां से लौटकर कोई नहीं आता।
छत्तीसगढ़ इस वक्त सिर्फ बाढ़ नहीं झेल रहा, वह मासूम सपनों की लाशें ढो रहा है।




