Close Menu
KhabarwaadKhabarwaad
    Top Posts

    तमनार में पेलमा कोयला खदान का विरोध, यूथ कांग्रेस ने अदाणी ग्रुप पर साधा निशाना

    May 9, 2026

    युवा कांग्रेस में संगठनात्मक सरगर्मी तेज, सदस्यता अभियान के साथ चुनावी तैयारियां शुरू

    May 8, 2026

    व्हाट्सएप पर जान से मारने की धमकी, पीठाधीश्वर ने मांगी पुलिस सुरक्षा

    April 28, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • तमनार में पेलमा कोयला खदान का विरोध, यूथ कांग्रेस ने अदाणी ग्रुप पर साधा निशाना
    • युवा कांग्रेस में संगठनात्मक सरगर्मी तेज, सदस्यता अभियान के साथ चुनावी तैयारियां शुरू
    • व्हाट्सएप पर जान से मारने की धमकी, पीठाधीश्वर ने मांगी पुलिस सुरक्षा
    • राजधानी के प्राचीन रावण भाटा मैदान में रॉयल डिज्नीलैंड मेला का शुभारंभ
    • “कागज शून्य, पानी फुल: पिकाडली ‘बियर फैक्ट्री’ में बड़ा खेल”
    • ‘औद्योगिक आतंकवाद’ का आरोप: जमीन विवाद से तंग किसान हाईटेंशन टावर पर चढ़ा
    • हैवानियत की हद: एयर ब्लोअर से मजदूर के मलद्वार में भरी हवा, हालत नाजुक
    • डांस टीचर मर्डर मिस्ट्री सुलझी: 500 CCTV और 5000 मोबाइल नंबर खंगालने के बाद पुलिस के हाथ लगा नाबालिग आरोपी
    Facebook X (Twitter) Instagram
    KhabarwaadKhabarwaad
    Saturday, May 9
    • Home
    • छत्तीसगढ़
      • रायपुर संभाग
      • दुर्ग संभाग
      • बिलासपुर संभाग
      • बस्तर संभाग
      • सरगुजा संभाग
    • मध्यप्रदेश
    • राष्ट्रीय समाचार
    • अपराध
    • राजनीति
    • धर्म एवं समाज
    • अफसरशाही
    • खेल
    • मनोरंजन
    • स्वास्थ्य
    • राशिफल
    • Auto & Gadget
    KhabarwaadKhabarwaad
    Home » बच्चों के खाने में फिनाइल मिलाने वाला शिक्षक पुलिस हिरासत में, हाईकोर्ट ने स्वतः लिया संज्ञान – मांगा हलफनामा

    बच्चों के खाने में फिनाइल मिलाने वाला शिक्षक पुलिस हिरासत में, हाईकोर्ट ने स्वतः लिया संज्ञान – मांगा हलफनामा

    Shrikant BaghmareBy Shrikant BaghmareAugust 27, 2025 trending No Comments5 Mins Read
    झूठे केस में फंसाने का आरोप: बिलासपुर एसपी से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा

    सुकमा । कल्पना कीजिए—एक सरकारी आवासीय विद्यालय, जहां सैकड़ों गरीब और आदिवासी बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ तीन वक्त का भोजन पाते हैं। बस्तर जैसे इलाके से माता-पिता अपने बच्चों को वहाँ भेजते हैं, यह सोचकर कि स्कूल में उन्हें सुरक्षित माहौल और देखभाल मिलेगी। लेकिन अगर उसी थाली में बच्चों को पढ़ाई नहीं, मौत परोसी जाए तो?

    सुकमा जिले के छिंदगढ़ ब्लॉक के ग्राम पकेला आवासीय पोटाकेबिन स्कूल में बच्चों के खाने में फिनाइल मिलाकर उनकी जान लेने की कोशिश की गई। यह कोशिश बदले के भावना से वहां के शिक्षक धनंजय साहू ने की थी। एन वक्त पर पोटाकेबिन के अधीक्षक ने खाने में फिनाइल की गंध पाकर खाने को फेंकवा दिया। नहीं तो अनर्थ हो जाता। खाने में फिनाइल मिलाने वाले शिक्षक धनंजय साहू को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है और पूछताछ कर रही है।

    हाईकोर्ट ने स्वतः लिया संज्ञान

    मंगलवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा—“यह घटना चौंकाने वाली है। यदि बच्चे यह भोजन खा लेते तो न जाने कितने परिवारों पर कैसी विपत्ति आती।” अदालत ने यह भी चेताया कि फिनाइल की एक बूंद भी इंसान, खासकर बच्चों के लिए, घातक होती है।

    यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि एक आपराधिक कृत्य है। अदालत ने साफ कहा कि बार-बार ऐसी घटनाएँ समाज के विश्वास को तोड़ती हैं। जिन संस्थानों पर बच्चों की सुरक्षा और पोषण की जिम्मेदारी है, वहीं अगर मौत का सामान परोसा जाए, तो यह व्यवस्था पर ही सवाल खड़ा कर देता है।

    जिम्मेदारी का सवाल

    राज्य सरकार की ओर से सुकमा कलेक्टर ने जांच के आदेश दे दिए हैं। लेकिन अदालत यहीं नहीं रुकी। उसने मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ को कड़े निर्देश दिए कि अगली सुनवाई तक हलफनामा दाखिल कर बताएं कि इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए क्या कदम उठाए गए।

    निर्देशों में शामिल हैं—

    • हर दिन भोजन की जांच और शिक्षकों द्वारा प्रमाणन।
    • रसोईघरों की नियमित जांच और रिकॉर्ड का रखरखाव।
    • रसायनों को खाद्य सामग्री से पूरी तरह अलग रखना।
    • जिलों में नोडल अधिकारी की नियुक्ति और संस्थान प्रमुखों की जवाबदेही।
    • छात्रावासों और स्कूल किचन में सीसीटीवी कैमरे।
    • कर्मचारियों को स्वच्छता और आपातकालीन हालात से निपटने का प्रशिक्षण।
    • जानबूझकर मिलावट के मामलों में तत्काल FIR।
    • अभिभावक-शिक्षक समितियाँ और राज्य स्तरीय हेल्पलाइन।
    • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से आपात चिकित्सा व्यवस्था और फर्स्ट-एड किट।
    • हर घटना की रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर को।
    • भोजन योजनाओं का स्वतंत्र ऑडिट।

    इन प्रावधानों से साफ है कि अदालत केवल नाराज़गी नहीं जता रही, बल्कि व्यवस्था सुधारने का रोडमैप भी सामने रख रही है।

    बार-बार क्यों दोहराई जा रही हैं ऐसी घटनाएँ?

    यह सवाल सबसे अहम है। यह कोई पहला मामला नहीं है। स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों से अक्सर दूषित भोजन, कीड़े मिलने या बच्चों के बीमार पड़ने की खबरें आती रहती हैं। इसके पीछे कई कारण हैं—

    • निगरानी का अभाव: भोजन बनने और परोसने की प्रक्रिया की नियमित जांच नहीं होती।
    • सिस्टम की उदासीनता: जिम्मेदार अधिकारियों को पता है कि कार्रवाई औपचारिक होगी, सजा शायद ही मिलेगी।
    • प्रशिक्षण की कमी: रसोइयों और स्टाफ को अक्सर स्वच्छता या खाद्य सुरक्षा की बुनियादी जानकारी नहीं होती।
    • संसाधनों की कमी: कई स्कूलों में किचन जर्जर हालत में हैं, भंडारण के सुरक्षित इंतज़ाम नहीं।

    इन सबके चलते बच्चों की थाली बार-बार खतरे में पड़ जाती है।

    भरोसे का संकट

    यह घटना केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि भरोसे का संकट है। गरीब और आदिवासी परिवार बड़ी उम्मीद से बच्चों को आवासीय विद्यालयों में भेजते हैं। वे मानते हैं कि सरकार उनके बच्चों को पढ़ाएगी, खिलाएगी, सुरक्षित रखेगी। लेकिन जब इसी व्यवस्था से मौत का साया उठने लगे, तो समाज का विश्वास डगमगाता है।

    अदालत ने सही कहा—यह सिर्फ बच्चों की ज़िंदगी का मामला नहीं है, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों की उम्मीदों और विश्वास का भी है, जो अपनी संतानों को सरकार की देखरेख में सौंपते हैं।

    आगे का रास्ता

    अदालत ने 17 सितंबर तक मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा है। यह सिर्फ एक कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि सरकार के लिए एक चेतावनी है।
    जरूरी है कि इस घटना को एक “केस स्टडी” की तरह लेकर पूरे प्रदेश में व्यापक सुधार किए जाएँ।

    • किचन का आधुनिकीकरण: आधुनिक और सुरक्षित किचन, जहाँ रसायन व खाद्य सामग्री बिल्कुल अलग रखी जाए।
    • तकनीक का इस्तेमाल: सीसीटीवी, डिजिटल रिकॉर्ड और QR आधारित फूड-टेस्टिंग सिस्टम।
    • समुदाय की भागीदारी: अभिभावक समितियाँ और स्थानीय निगरानी।
    • सख्त जवाबदेही: लापरवाही साबित होते ही अधिकारियों और स्टाफ पर कड़ी सजा।

    सुकमा की यह घटना एक बड़ी चेतावनी है। यह बताती है कि बच्चों की सुरक्षा और भोजन की गुणवत्ता पर जरा-सी ढिलाई भी किस तरह भयावह नतीजे ला सकती है। अदालत ने इसे केवल कानून की भाषा में नहीं, बल्कि एक समाजिक संदेश की तरह रखा है—बच्चों की थाली में लापरवाही नहीं, पोषण होना चाहिए।

    अब देखना है कि सरकार इस चेतावनी को कितना गंभीरता से लेती है। क्या यह केवल कागजों में रह जाएगा, या सचमुच स्कूलों और छात्रावासों में बच्चों की थाली सुरक्षित होगी?

     

    • Get News Portal Website @Rs.5999 | WhatsApp on +91 8871571321
    • Get Web Hosting @Rs49 | Visit - HostRT.in
    #Sukma #Chhattisgarh #HighCourt #FoodSafety #HostelKids #SchoolSafety #BalSuraksha #Accountability
    Share. Facebook Twitter LinkedIn Email Telegram WhatsApp
    Shrikant Baghmare
    • Website

    Keep Reading

    तमनार में पेलमा कोयला खदान का विरोध, यूथ कांग्रेस ने अदाणी ग्रुप पर साधा निशाना

    व्हाट्सएप पर जान से मारने की धमकी, पीठाधीश्वर ने मांगी पुलिस सुरक्षा

    राजधानी के प्राचीन रावण भाटा मैदान में रॉयल डिज्नीलैंड मेला का शुभारंभ

    “कागज शून्य, पानी फुल: पिकाडली ‘बियर फैक्ट्री’ में बड़ा खेल”

    ‘औद्योगिक आतंकवाद’ का आरोप: जमीन विवाद से तंग किसान हाईटेंशन टावर पर चढ़ा

    रीवा के लिए खुशखबरी: अब रायपुर से सीधे मिलेगी फ्लाइट, 17 मार्च से उड़ान शुरू

    Add A Comment

    Comments are closed.

    Khabarwaad Vacancy

    Pages

    • Home
    • About Us
    • Privacy Policy
    • Contact Us

    Categories

    • छत्तीसगढ़
    • मध्यप्रदेश
    • राष्ट्रीय समाचार
    • अपराध
    •  
    • खेल
    • राजनीति
    • धर्म एवं समाज
    • मनोरंजन

    Owner / Editor Details :- 

    Name :- Shrikant Baghmare

    Contact :- 6264 390 985

    Email :- khabarwaadnews@gmail.com

     

    © 2026 Maintained By RTISPL
    • Home
    • About Us
    • Privacy Policy
    • Terms of service
    • Contact Us

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.