नई दिल्ली। इस साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण आगामी 7 सितंबर (रविवार) को लगने जा रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाने वाला यह ग्रहण कुंभ राशि और भाद्रपद नक्षत्र में लगेगा। विशेष बात यह है कि इसी दिन से पितृपक्ष की भी शुरुआत हो रही है।
ग्रहण का समय और अवधि
खगोलविदों के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण रात 9 बजकर 58 मिनट से शुरू होगा और देर रात 1 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगा। इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा, जिसे “ब्लड मून” कहा जाता है। ऐसा दृश्य कई वर्षों में एक बार ही देखने को मिलता है।
कहां-कहां होगा दृश्यमान
भारत सहित एशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका, फिजी और अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में यह चंद्र ग्रहण साफ तौर पर देखा जा सकेगा।
सूतक काल और धार्मिक मान्यताएं
इस ग्रहण का सूतक काल 7 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 57 मिनट से शुरू हो जाएगा। मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल और ग्रहण के समय में पूजा-पाठ, भोजन और नए कार्यों की शुरुआत वर्जित मानी जाती है।
क्या न करें चंद्र ग्रहण के दौरान
ज्योतिषियों के मुताबिक चंद्र ग्रहण के समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए—
- गुस्सा या विवाद से बचें।
- भोजन ग्रहण न करें।
- शुभ कार्यों की शुरुआत न करें।
- पूजा-पाठ करना भी वर्जित है।
ज्योतिषीय महत्व
चंद्र ग्रहण को ज्योतिष शास्त्र में एक बड़ी घटना माना गया है। इस दौरान नकारात्मक ऊर्जाओं की सक्रियता अधिक होती है, इसलिए सावधानी बरतना आवश्यक है।




