रायपुर। रायगढ़ के युवा नेता और भाजयुमो के पूर्व अध्यक्ष रवि भगत ने एक बार फिर से सरकार को असहज करते हुए यह साफ़ कर दिया है कि वे कुर्सी से नहीं, मुद्दों से राजनीति करते हैं।
दरअसल, भाजयुमो अध्यक्ष का पदभार नए अध्यक्ष को सौंपने के अगले ही दिन उन्होंने रायगढ़ के प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम से मुलकात की। इस मुलकात में उन्होंने मंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए कहा है कि खनन प्रभावित क्षेत्र की बुनियादी ज़रूरतों पर ही DMF का पैसा खर्च होना चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। भगत के इस तेवर एक बात तो साफ़ है कि पद रहे, न रहे। वे अपने क्षेत्र की जनता के हक अधिकार की लड़ाई लड़ते रहेंगे।
रवि भगत ने पहले भी यही मांग वित्त मंत्री ओपी चौधरी के समक्ष रखी थी। लेकिन चौधरी की चुप्पी और उदासीनता के बाद भगत ने सोशल मीडिया पर सीधा हमला बोला। यही कारण था कि उन्हें कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया। हालांकि संगठन ने उनकी टिप्पणी को पार्टी-विरोधी नहीं बल्कि अफसरशाही-विरोधी माना, फिर भी पुनर्गठन की प्रक्रिया में उन्हें अपना पद गंवाना पड़ा।
नेताम से मांग पत्र
अब भगत ने रामविचार नेताम को पत्र सौंपकर कहा है कि रायगढ़ में DMF का उपयोग नियमों के विपरीत हो रहा है। खनन से प्रभावित इलाकों में मूलभूत सुविधाएं अब भी अधूरी हैं। उन्होंने आग्रह किया कि भाजपा की केंद्र सरकार की नीति और राज्य कैबिनेट के निर्णय के मुताबिक ही खर्च सुनिश्चित किया जाए। इसके आलावा निगरानी समिति के भी गठन की मांग रवि भगत ने की है।
पद से ऊपर क्षेत्र का विकास
रवि भगत का रुख साफ है—पद का प्रलोभन उन्हें विचलित नहीं कर सकता। उनका मानना है कि अगर उनकी ही पार्टी की सरकार नियमों से भटकती है, तो वे सवाल उठाते रहेंगे। यही अंदाज उन्हें बाकी युवा नेताओं से अलग करता है और शायद यही वजह है कि प्रदेश के युवाओं में उनकी छवि अलग और मुखर है।




