नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने शिक्षकों की योग्यता (TET परीक्षा) और अल्पसंख्यक संस्थानों के अधिकारों से जुड़े मामले को मुख्य न्यायाधीश (CJI) को भेज दिया है। अब यह मामला सात जजों की बड़ी बेंच सुनेगी।
कोर्ट ने कहा कि जिन शिक्षकों की सेवा में पांच साल से कम समय शेष है, वे बिना TET पास किए पढ़ा सकते हैं, लेकिन उन्हें प्रमोशन नहीं मिलेगा। वहीं, जिनकी सेवा अवधि पांच साल से अधिक बची है, उन्हें दो साल के भीतर TET पास करना अनिवार्य होगा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि कई शिक्षक पिछले दो दशकों से बिना TET पास किए पढ़ा रहे हैं और उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं है। साथ ही, 2014 के प्रमाटी फैसले पर भी सवाल उठाए गए, जिसमें कहा गया था कि RTE कानून अल्पसंख्यक संस्थानों पर लागू नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि इस फैसले पर पुनर्विचार जरूरी है।
अब सात जजों की बेंच यह तय करेगी कि RTE कानून की धाराएं अल्पसंख्यक संस्थानों पर लागू होंगी या नहीं और क्या इसमें उनके अधिकारों से टकराव है।




