बिलासपुर। गरीबों को छत दिलाने के नाम पर भी अब ठगी का कारोबार हो रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी गरीबोन्मुखी योजना को लेकर भाजपा नेत्री सपना सराफ द्वारा की गई धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद पूरे शहर में हड़कंप मचा है। सरकंडा थाना पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है।
आरोप है कि राजकिशोर नगर की कल्याण बाग कॉलोनी निवासी सपना सराफ ने उमा साहू और संतोषी विश्वकर्मा से आवास दिलाने का झांसा देकर 3 लाख 40 हजार रुपये ऐंठ लिए। इतना ही नहीं, दोनों को झूठी रसीद भी थमा दी। जब रसीदों का मिलान निगम कार्यालय में किया गया तो फर्जीवाड़ा उजागर हुआ।
पीड़ित महिलाएं आवास न मिलने और लंबे समय तक ठगी का शिकार होने के बाद कलेक्टर संजय अग्रवाल के जनदर्शन में पहुँचीं। कलेक्टर ने तुरंत निगम कमिश्नर को जांच के आदेश दिए। जांच के बाद निगम में पदस्थ बाबू सौरभ तिवारी ने एफआईआर दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपी महिला पर धोखाधड़ी, जालसाजी और कूटरचना की धाराओं (420, 467, 468, 471) में कार्रवाई की है।
इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
- क्या गरीबों के लिए बनी योजना भी अब दलालों और नेताओं के शिकंजे में है?
- क्या राजनीतिक पहचान का इस्तेमाल कर जनता के साथ विश्वासघात करना नया ट्रेंड बन गया है?
- और सबसे अहम—इस तरह की घटनाओं से प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं की विश्वसनीयता पर क्या असर पड़ेगा?
सकारात्मक पहलू यह भी है कि शिकायत पर कलेक्टर और निगम ने त्वरित कार्रवाई की, जिससे आरोपी को पकड़ना संभव हुआ। लेकिन यह घटना प्रशासनिक सतर्कता पर भी सवाल उठाती है कि पहले ही इस तरह की ठगी क्यों नहीं पकड़ी जा सकी।
यह घटना एक सबक है कि भ्रष्टाचार अब सिर्फ़ कागज़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे गरीब की चौखट तक पहुँच चुका है।
और जब गरीब के घर का ही सौदा होने लगे, तो समझ लीजिए लोकतंत्र की बुनियाद हिल रही है।




