विदिशा। भारत की सांस्कृतिक विविधता का एक अनूठा उदाहरण मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के शमशाबाद विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिलता है। यहां नटेरन तहसील से 6 किलोमीटर दूर एक गांव है, जिसका नाम रावण है। इस गांव में रावण बाबा का प्राचीन मंदिर है, जहां उनकी 6 फीट लंबी लेटी हुई प्रतिमा स्थापित है, जो देखने वालों का मन मोह लेती है।
रावण बाबा मंदिर का अनोखा इतिहास
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है। मंदिर से 3 किलोमीटर उत्तर में एक पहाड़ी है, जहां प्राचीन काल में बुद्धा नामक राक्षस रहता था। वह रावण से युद्ध करना चाहता था, लेकिन लंका की भव्यता और दूरी के कारण उसका बल कमजोर पड़ जाता था। एक दिन रावण ने उससे उसकी परेशानी पूछी। बुद्धा ने बताया कि वह युद्ध की इच्छा से आता है, लेकिन थकान के कारण असमर्थ रहता है। तब रावण ने उसे अपनी प्रतिमा बनाकर उससे युद्ध करने को कहा। बुद्धा ने वैसा ही किया और उसी प्रतिमा से उसका अंत हुआ। लोगों ने इस चमत्कारी प्रतिमा के सम्मान में वहां मंदिर बना दिया।
रावण बाबा की पूजा और तालाब की मान्यता
गांव का नाम इसी मंदिर के कारण रावण पड़ा। यहां कोई भी शादी, समारोह या हवन-पूजन शुरू करने से पहले रावण बाबा की पूजा की जाती है। समारोहों में रावण बाबा की नाभि में तेल भरकर शुभारंभ किया जाता है। मंदिर के पास एक तालाब भी है, जिसमें रावण बाबा की प्राचीन पत्थर की तलवार मौजूद है। इस तालाब के पानी को लोग गंगा के समान पवित्र मानते हैं और इसे पीकर बीमारियों से मुक्ति पाते हैं। जब तालाब सूख जाता है, तब लोग इसकी मिट्टी से स्नान करते हैं।
गांव में रावण के प्रति गहरी आस्था
रावण बाबा के प्रति लोगों की आस्था इतनी गहरी है कि नए वाहन खरीदने पर उस पर रावण बाबा का नाम लिखवाया जाता है। मंदिर के पास से गुजरते समय लोग हॉर्न बजाकर या प्रणाम करके सम्मान प्रकट करते हैं। कुछ लोग अपने शरीर पर भी “रावण बाबा की जय” लिखवाते हैं। जहां देशभर में दशहरे पर रावण दहन होता है, वहीं इस गांव में दशहरे को शोक के रूप में मनाया जाता है। रावण बाबा को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा, भंडारा और रामायण पाठ आयोजित किए जाते हैं। यह गांव भारत की उस सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है, जहां एक ओर राम की पूजा होती है, तो दूसरी ओर रावण को भी सम्मान दिया जाता है।




