रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमीन की बढ़ी कीमतों को लेकर उठे विरोध के बीच सरकार ने बड़ी राहत देते हुए नई कलेक्टर गाइडलाइंस की समीक्षा करने का फैसला लिया है। रजिस्ट्रेशन विभाग ने शहरों में लागू की गई नई दरों और वैल्यूएशन प्रावधानों को रोकते हुए इन्हें दोबारा जांचने का निर्णय लिया है। इसके लिए सेंट्रल वैल्यूएशन बोर्ड ने सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी है।
बोर्ड की बैठक के बाद इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन एवं सुपरिटेंडेंट ऑफ स्टैंप्स, छत्तीसगढ़, रायपुर ने संशोधित गाइडलाइन जारी की। इसमें कुल 6 बड़े बदलाव किए गए हैं। साथ ही जिला मूल्यांकन समितियों को 31 दिसंबर 2025 तक संशोधित प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
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इससे पहले रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने नई गाइडलाइन को भ्रामक बताते हुए कहा था कि इससे केवल 1% किसानों को लाभ होगा, जबकि 99% आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी गाइडलाइन दरों को अव्यवहारिक बताया और यह सवाल उठाया कि कैबिनेट से ऊपर कौन-सी शक्ति इन गाइडलाइंस को मंजूरी दे रही है।
नई गाइडलाइन के प्रमुख बदलाव
1. इंक्रीमेंटल आधार पर मूल्यांकन खत्म
- 1400 वर्गमीटर तक चल रही इंक्रीमेंटल वैल्यूएशन व्यवस्था समाप्त।
- पुराने स्लैब रेट फिर से लागू:
- नगर निगम: 50 डेसिमल
- नगर पालिका: 37.5 डेसिमल
- नगर पंचायत: 25 डेसिमल
2. फ्लैट/दुकानों का मूल्यांकन अब बिल्ट-अप क्षेत्र से
- सुपर बिल्ट-अप की जगह सिर्फ बिल्ट-अप एरिया के अनुसार मूल्यांकन।
- मध्यप्रदेश काल से चल रही व्यवस्था खत्म।
- इससे वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा।
3. मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग में तल के आधार पर दरों में कमी
- बेसमेंट/पहली मंजिल: 10% कम
- दूसरी मंजिल एवं ऊपर: 20% कम
- इससे आम और मध्यम वर्ग के लिए फ्लैट सस्ते होने की उम्मीद।
4. कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स में 20 मीटर के बाद 25% कमी
- मुख्य सड़क से दूर स्थित दुकानों को राहत।
- 20 मीटर की दूरी कॉम्प्लेक्स के मुख्य मार्ग से निर्मित हिस्से तक मापी जाएगी।
5. जिला प्रस्तावों पर केंद्रीय बोर्ड लेगा अंतिम निर्णय
- पहले की तरह सिर्फ प्रस्ताव भेजने की व्यवस्था खत्म।
- अब सभी प्रस्तावों का गहन विश्लेषण होगा।
- इससे वास्तविक बाजार दरों के अनुरूप गाइडलाइन तय करने में मदद मिलेगी।
जिला समितियों को निर्देश
सेंट्रल वैल्यूएशन बोर्ड ने सभी जिला वैल्यूएशन कमेटियों को हाल ही में बढ़े रेटों पर आए मेमोरेंडम, आपत्तियों और सुझावों की समीक्षा करने को कहा है। गाइडलाइन रेट में संभावित बदलावों के लिए 31 दिसंबर तक प्रस्ताव जमा करने होंगे।




