रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित आबकारी घोटाले में अब मामला जांच से आगे बढ़कर अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज हो गया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने विशेष न्यायालय में आठवां अभियोग पत्र प्रस्तुत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को घोटाले की कथित “मुख्य लाभार्थी कड़ी” के रूप में दर्शाया है। अभियोग पत्र में आबकारी विभाग के भीतर संगठित अवैध वसूली तंत्र यानी “शराब सिंडिकेट” के गठन, संचालन और संरक्षण की पूरी रूपरेखा कोर्ट के समक्ष रखी गई है।
अदालत में दाखिल चार्जशीट के अनुसार जांच एजेंसी का आरोप है कि इस सिंडिकेट के जरिए की गई अवैध वसूली का बड़ा हिस्सा चैतन्य बघेल तक पहुंचा। EOW ने कोर्ट को बताया कि जांच के दौरान ऐसे दस्तावेजी और बैंकिंग साक्ष्य सामने आए हैं, जिनसे 200 से 250 करोड़ रुपये की राशि चैतन्य बघेल तक पहुंचने की पुष्टि होती है। अभियोजन के मुताबिक यह रकम प्रत्यक्ष भुगतान के बजाय परोक्ष रास्तों से, विभिन्न फर्मों और मध्यस्थों के जरिये ट्रांसफर की गई।
चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि त्रिलोक सिंह ढिल्लन से संबद्ध फर्मों का उपयोग कर धन का “लेयरिंग” किया गया, ताकि अवैध स्रोत को छिपाया जा सके। अदालत को बताया गया कि इसके बाद इस राशि को बैंकिंग चैनल के माध्यम से रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेश किया गया, जिससे घोटाले की रकम को वैध पूंजी का रूप दिया जा सके। जांच एजेंसी ने इसे सुनियोजित मनी ट्रेल और प्रोसीड्स ऑफ क्राइम का उपयोग बताया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार घोटाले की रकम को छिपाने के लिए पारिवारिक मित्रों और करीबी सहयोगियों के खातों का भी इस्तेमाल किया गया। इन खातों के माध्यम से रकम को टुकड़ों में घुमाया गया और फिर विभिन्न परियोजनाओं में लगाया गया। EOW का दावा है कि यह पूरा नेटवर्क एक तय रणनीति के तहत संचालित किया गया, ताकि जांच एजेंसियों की नजर से बचा जा सके।
अदालत में पेश आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की कुल अवैध राशि अब तक 3,074 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें ठेकों में हेरफेर, अवैध वसूली, कमीशनखोरी और सिंडिकेट के जरिए की गई कमाई शामिल है। अभियोजन ने कोर्ट को यह भी अवगत कराया है कि जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह राशि आगे और बढ़ सकती है।
चार्जशीट दाखिल होने के साथ ही अब मामला पूरी तरह न्यायिक परीक्षण के चरण में प्रवेश कर चुका है। विशेष अदालत को तय करना है कि आरोपों पर संज्ञान लेकर आगे की सुनवाई किस तरह होगी। जांच एजेंसी का कहना है कि कानून के समक्ष सभी आरोपी बराबर हैं और इस मामले में किसी भी स्तर पर रियायत का प्रश्न नहीं है।
शराब घोटाले का यह प्रकरण अब राजनीतिक बहस से निकलकर अदालत की दहलीज पर पहुंच चुका है, जहां हर दावा दस्तावेज और साक्ष्य के तराजू पर तौला जाएगा। आने वाली सुनवाइयों में इस स्कैम से जुड़ी और परतें खुलने की संभावना जताई जा रही है।




