रायपुर। खारून नदी स्थित रेलवे ब्रिज पर चलती ट्रेन में सेल्फी ले रही 20 से 22 वर्ष की एक युवती का संतुलन बिगड़ गया और वह ट्रैक पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई। सिर पर गहरी चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना रात में हुई, लेकिन पुलिस को अगले दिन ट्रैक के किनारे रक्तरंजित शव मिलने की सूचना मिली।
लगातार तीन दिनों तक मृतका की पहचान नहीं हो सकी, जिसके बाद पुलिस ने उसे लावारिस मानकर दफन करा दिया। हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने अज्ञात युवती का शव मिलने की सूचना न तो मीडिया को दी और न ही उसकी तस्वीर साझा कर पहचान की कोई व्यापक कोशिश की। तीन नवंबर को अंतिम संस्कार करने के बाद भी प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से पहचान की अपील नहीं की गई।
यह मामला शहर में इससे पहले हुई एक घटना की याद दिलाता है। करीब पांच महीने पहले आमानाका पुलिस ने नाले में मृत पाए गए शंकरनगर निवासी इंजीनियर मृणाल (41) के शव को भी लावारिस मानते हुए दफन करा दिया था। एक जून को मृणाल का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था, जबकि सिविल लाइंस थाने में परिजनों ने उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई हुई थी। दोनों थानों के बीच सूचना के आदान-प्रदान की कमी के कारण मृतक की पहचान नहीं हो पाई। चार दिन पहले ही रिश्तेदारों को मृणाल की मौत की जानकारी मिल सकी।




