दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के तीनों मंडलों में मेमू ट्रेन चलाने वाले लोको पायलटों के एप्टीट्यूड सुटेबिलिटी टेस्ट की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बिलासपुर मंडल के 42 में से केवल 30 तथा नागपुर मंडल के 56 में से मात्र 33 लोको पायलट ही मानक पर खरे उतरे।
35 पायलटों को दोबारा टेस्ट का आदे
मंडल रेल प्रबंधक ने बिलासपुर के 12 तथा नागपुर के 23 लोको पायलटों को तत्काल एप्टीट्यूड टेस्ट पास करने के निर्देश जारी किए हैं। बिलासपुर, रायपुर और नागपुर मंडलों के लिए विस्तृत एक्शन प्लान जारी कर सभी नए लोको पायलटों को पैसेंजर लर्निंग ट्रेनिंग अनिवार्य रूप से पूरी करने को कहा गया है।
चार नवंबर बिलासपुर हादसे से सबक
चार नवंबर को लाल खदान के समीप गेवरा रोड से बिलासपुर आ रही मेमू ट्रेन ने डेंजर सिग्नल ओवरशूट कर खड़ी मालगाड़ी को पीछे से टक्कर मार दी थी। इस हादसे में 11 यात्रियों की मौत तथा 20 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
सूत्रों के अनुसार हादसे के समय ड्यूटी पर तैनात मृत लोको पायलट विद्यासागर ने साइकोलॉजिकल टेस्ट पास नहीं किया था। इस खामी के सामने आने के बाद रेलवे ने हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए त्वरित कदम उठाए हैं।
रेलवे सुरक्षा आयुक्त की जांच जारी है तथा सभी मंडलों में लोको पायलटों की मानसिक योग्यता की सतत निगरानी सुनिश्चित की जा रही है।




