रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भूमि खरीद-बिक्री के लिए निर्धारित कलेक्टर गाइडलाइन दरों में 100 प्रतिशत से 888 प्रतिशत तक की वृद्धि के निर्णय के खिलाफ रायपुर लोकसभा सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इस वृद्धि को जनविरोधी, अव्यावहारिक और आर्थिक अन्याय करार देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर निर्णय को तत्काल स्थगित करने की मांग की है।
सांसद अग्रवाल ने पत्र में कहा कि यह वृद्धि बिना किसी जन परामर्श, वास्तविक मूल्यांकन अथवा सामाजिक-आर्थिक प्रभावों की समीक्षा के लागू की गई है। इसके कारण किसान, छोटे व्यापारी, कुटीर उद्यमी, मध्यम वर्ग तथा रियल एस्टेट क्षेत्र के निवेशकों में व्यापक असंतोष व्याप्त है। उन्होंने इसे Ease of Living तथा Ease of Doing Business के सिद्धांतों के विपरीत बताया।
चौंकाने वाले उदाहरण सामने आए
पत्र में लाभांडी एवं निमोरा जैसे ग्रामीण क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए सांसद ने बताया कि वहां गाइडलाइन दरों में क्रमशः 725 प्रतिशत एवं 888 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जबकि इन क्षेत्रों में नगरीय सुविधाओं का कोई विस्तार नहीं हुआ है और वास्तविक बाजार मूल्य भी इतना नहीं है। साथ ही नवा रायपुर के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को अचानक नगरीय क्षेत्र घोषित करने के निर्णय पर भी सवाल उठाए गए हैं।
99 प्रतिशत जनता पर बोझ, 1 प्रतिशत के नाम पर निर्णय गलत
सरकार के उस तर्क को खारिज करते हुए कि वृद्धि से भूमि अधिग्रहण में किसानों को अधिक मुआवजा मिलेगा, सांसद ने कहा कि प्रदेश में मात्र 1 प्रतिशत भूमि ही अधिग्रहण के लिए ली जाती है। शेष 99 प्रतिशत जनता पर भारी आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है। उन्होंने पंजीयन शुल्क को मौजूदा 4 प्रतिशत से घटाकर 0.8 प्रतिशत करने की भी मांग की।
मुख्यमंत्री से की गई प्रमुख मांगें
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
– 20 नवंबर 2025 से लागू नई गाइडलाइन दरों को तत्काल स्थगित किया जाए
– पूर्ववर्ती गाइडलाइन दरें पुनः बहाल की जाएं
– स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित कर वास्तविक बाजार मूल्यांकन कराया जाए
– नवा रायपुर में शामिल ग्रामीण क्षेत्रों को पुनः ग्रामीण घोषित किया जाए
– पंजीयन शुल्क 4 प्रतिशत से घटाकर 0.8 प्रतिशत किया जाए
सांसद ने कहा कि जनभावनाओं का सम्मान किए बिना लिया गया यह निर्णय लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जनता की आवाज उठाना उनका दायित्व है और इस मुद्दे पर निरंतर सक्रिय रहेंगे।
प्रदेश में इस निर्णय के खिलाफ बढ़ते असंतोष के बीच सांसद बृजमोहन अग्रवाल की इस पहल को व्यापक जन समर्थन मिल रहा है।




