रायगढ़। शहर के आवारा कुत्ते इन दिनों सिर्फ गलियों में नहीं, बल्कि राजनीति के बीचोबीच घूम रहे हैं। वजह है बधियाकरण अभियान और उस पर महापौर का ऐसा बयान, जिसने कुत्तों के खाने की थाली को सीधा सियासत की प्लेट पर ला दिया है।
आवारा कुत्तों की बढ़ती फौज को कंट्रोल करने के लिए ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में बधियाकरण का काम शुरू हुआ है। जिम्मा संभाल रही है भिलाई की एक कंपनी। इसी अभियान का निरीक्षण करने महापौर जीवर्धन चौहान खुद बधियाकरण केंद्र पहुंचे। व्यवस्थाएं देखीं, हालचाल पूछा और जाते-जाते ऐसा बोल गए कि बयान वायरल हो गया।
महापौर ने कहा कि बधियाकरण के बाद कुत्तों को पौष्टिक आहार दिया जाए—खिचड़ी, दलिया… और बात-बात में बिरयानी भी आ गई। बस फिर क्या था, कांग्रेस को मसाला मिल गया।
कांग्रेस के पूर्व सभापति और नेता प्रतिपक्ष सलीम नियरिया ने चुटकी लेते हुए सवाल दाग दिया—
“महापौर साफ करें, बिरयानी चिकन की होगी या मटन की? और ये बिरयानी किस मद से आएगी? कहीं ऐसा न हो कि इंसानों की थाली सूखी रहे और कुत्तों की प्लेट में दमदार तड़का लग जाए।”
अब शहर में चर्चा ये नहीं कि कुत्तों की संख्या कैसे घटेगी, बल्कि ये है कि बधियाकरण के बाद उनका मेन्यू क्या होगा। खिचड़ी-दलिया तक बात समझ आती है, लेकिन बिरयानी ने पूरे अभियान को ‘डॉग केयर’ से उठाकर ‘डॉग डिनर डिबेट’ बना दिया है।
फिलहाल आवारा कुत्ते तो अपने हिसाब से भौंक रहे हैं, लेकिन रायगढ़ की राजनीति में इस वक्त सबसे ज्यादा आवाज उसी बिरयानी की गूंज रही है।




