सरगुजा : सदियों पुरानी परम्परा को कायम रखते हुए धार्मिक आस्था का पर्व भीमसेनी निर्जला एकादशी व्रत 17 जून दिन सोमवार को नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में व्रतधारियों ने उपवास रखे। यह पर्व गंगा दशहरा के एक रोज बाद ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता अनुसार सभी 24 एकादशीयो में श्रेष्ठ एवं अक्षय फल प्रदान करने वाला माना जाता है। इस व्रत में पानी पीने की मनाही होने से इसे निर्जला एकादशी कहा जाता है। एक कठोर साधना है।धार्मिक मान्यता अनुसार महाभारत काल में इस व्रत को पांडव पुत्र भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास के परामर्श पर किया था।तब से इस व्रत को करने की प्रथा आरंभ हुई। इस व्रत के करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
महिला पुरुष श्रद्धालुओं ने निर्जला एकादशी का उपवास रखा हैं ।कल यानि 18 जून मंगलवार को व्रत तोड़ कर निश्चिंत समय में पारण किया जायेगा।नगर लखनपुर में एक तरफ़ हिन्दू सम्प्रदाय के लोग निर्जला एकादशी व्रत मना रहे हैं वहीं दूसरे ओर मुस्लिम समुदाय के लोग इद- उल -अजहा बकरीद के जश्न में डूबे हुए हैं। दोनों का मिला-जुला असर है।




