नई दिल्ली। पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन में मधुरता की कामना से किया जाने वाला हरतालिका तीज का व्रत इस वर्ष 26 अगस्त को रखा जाएगा। भादो शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाया जाने वाला यह पर्व विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
व्रत की शुरुआत और पारण
हरतालिका तीज का शुभारंभ प्रातःकाल सरगी से होता है और अगले दिन सूर्योदय के समय व्रत का पारण किया जाता है। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा पांच प्रहरों में की जाती है।
- सरगी का मुहूर्त: प्रातः 04:27 से 05:12 बजे तक
- पारण का समय: अगले दिन सूर्योदय के समय
पूजन विधि और शुभ मुहूर्त
सुबह स्नानादि के बाद महिलाएं शिव-पार्वती की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित कर संकल्प लेंगी।
- प्रातःकालीन पूजा: सुबह 05:56 से 08:31 बजे तक
- कथा श्रवण (अभिजीत मुहूर्त): 11:57 से दोपहर 12:48 बजे तक
- प्रदोषकालीन पूजा: शाम 06:49 से 07:11 बजे तक
- निशीथ काल जागरण और मंत्र जाप: रात 12:01 से 12:45 बजे तक
परंपरा और महत्व
इस अवसर पर सास अपनी बहू को सरगी देती है, जिसमें फल, मिठाई, सूखे मेवे, वस्त्र और श्रृंगार सामग्री शामिल होती है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से पति की आयु लंबी होती है और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
राहुकाल
व्रत के दिन दोपहर 03:36 से 05:13 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस दौरान किसी भी प्रकार के शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।




