रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत अब सिर्फ भाषणों और नारों तक सीमित नहीं रही। कांग्रेस ने मतदाता सूची में धांधली और चुनाव प्रणाली की गड़बड़ियों को सीधे लोकतंत्र की जड़ पर हमला बताकर मोर्चा खोल दिया है। पार्टी 9 सितंबर को बिलासपुर में ‘वोट चोरी-गद्दी छोड़’ रैली करने जा रही है, जिसमें राष्ट्रीय नेता भी मंच साझा करेंगे।
राजीव भवन में हुई बैठक में पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने साफ कर दिया—यह रैली सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने वाली होगी। बैठक में जिला अध्यक्षों को जिम्मेदारी सौंपी गई और रणनीति पर लंबी चर्चा हुई। इधर, कल ही दीपक बैज ने एक वीडियो जारी कर जल्द वोट चोरी और भाजपा एवं चुनाव आयोग के बीच साठ-गांठ होने के सबूत पेश करने की बात कही थी।
क्यों छत्तीसगढ़?
छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव नजदीक अ रहे हैं ऐसे में देशभर में मतदाता सूची की गड़बड़ी की शिकायतें लगातार उठ रही हैं। कांग्रेस का मानना है कि साजिशन मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं और फर्जी नाम जोड़े जा रहे हैं। यही वजह है कि पार्टी अब इस राष्ट्रीय मुद्दे को छत्तीसगढ़ की जमीन पर बड़ा आंदोलन बनाने में जुट गई है।
बिलासपुर क्यों चुना गया?
बिलासपुर को कांग्रेस ने इस अभियान की शुरुआत के लिए चुना है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बिलासपुर न सिर्फ भाजपा का गढ़ माना जाता है, बल्कि यहां से उठी गूंज पूरे राज्य में असर डालेगी।
आगे की राजनीति
- अगर भीड़ उमड़ी और नारे गूंजे, तो कांग्रेस के लिए यह चुनावी अभियान का टर्निंग पॉइंट होगा।
- बीजेपी पर सीधा दबाव बनेगा कि वह चुनाव आयोग की पारदर्शिता को लेकर सफाई दे।
- विपक्षी एकजुटता को भी यह रैली एक साझा मुद्दा दे सकती है, क्योंकि “वोट चोरी” किसी भी पार्टी के लिए सहने योग्य नहीं है।
बिलासपुर की रैली आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की सियासत को गरमाने वाली है। यह सिर्फ गद्दी की लड़ाई नहीं, बल्कि चुनावी ईमानदारी पर खड़ा बड़ा सवाल है। और जब सवाल लोकतंत्र की बुनियाद का हो, तो राजनीति में हलचल होना तय है।




