रायपुर। दुर्ग जिले में औषधि प्रशासन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नशीली और प्रतिबंधित दवाओं के अवैध कारोबार का खुलासा किया है। कार्रवाई के तहत देवभगत फार्मेसी (दुर्ग शहर) और सिन्हा मेडिकल स्टोर (पाटन क्षेत्र) में दबिश देकर बिना वैध बिल और दस्तावेजों के भारी मात्रा में नारकोटिक दवाएं जब्त की गई हैं।
औषधि निरीक्षकों को सूचना मिली थी कि दुर्ग जिले के कुछ मेडिकल स्टोर्स में नियंत्रित औषधियाँ जैसे ट्रामाडोल (Tramadol), कोडीन युक्त कफ सिरप (Codeine Syrups) और एमटीपी किट्स (MTP Kits) अवैध रूप से बेची जा रही हैं। यह सभी दवाएं नशे और गैरकानूनी चिकित्सा गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं। औषधि निरीक्षकों ने स्थानीय पुलिस के साथ देवभगत फार्मेसी और सिन्हा मेडिकल स्टोर पर छापा मारा, जहाँ यह आशंका सच साबित हुई।
कार्रवाई के दौरान दोनों मेडिकल स्टोर्स की औषधि अनुज्ञप्तियाँ (लाइसेंस) तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गईं। इसके साथ ही इनके विरुद्ध औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य व्यक्तियों और सप्लाई नेटवर्क की भी जाँच चल रही है.
यह कार्रवाई राज्य सरकार के “अवैध औषधि नियंत्रण अभियान” के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य गैरकानूनी औषधियों के विक्रय और दुरुपयोग पर रोक लगाना और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा करना है। औषधि नियंत्रण अधिकारियों ने साफ किया है कि “प्रदेश में किसी भी संस्थान को जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि कोई मेडिकल स्टोर नशीली या प्रतिबंधित दवाएं अवैध रूप से बेचता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रामाडोल, कोडीन युक्त सिरप और एमटीपी किट जैसी दवाएं नियंत्रण में रहकर सीमित चिकित्सकीय उपयोग के लिए ही अनुमोदित होती हैं, लेकिन यदि इन्हें खुलेआम बेचा जाए तो यह युवा वर्ग में नशे की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे सकती हैं और महिलाओं में गर्भपात जैसे गंभीर मामलों में दुरुपयोग हो सकता है।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी मेडिकल स्टोर में संदिग्ध गतिविधियाँ या नशीली दवाओं की बिक्री होती दिखाई दे, तो तुरंत निकटवर्ती औषधि निरीक्षक या पुलिस को सूचित करें। आपकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी।




