रायपुर। शहर में हाल ही में पुलिस कमिश्नरेट लागू हुआ है। मंशा साफ थी—कानून-व्यवस्था और ज्यादा चुस्त, जवाबदेही और सख्त। लेकिन मालवीय रोड पर जो हुआ, उसने सिस्टम को हल्की सी चुटकी जरूर काट ली।
कोतवाली इलाके में, थाने से महज कुछ मीटर की दूरी पर, स्कूली छात्रों के दो गुट आमने-सामने आ गए। वजह? किसी छात्र की गर्लफ्रेंड को छेड़ने का आरोप। यानी कमिश्नरेट मॉडल के बीच ‘दिल का मामला’ सड़क पर उतर आया।
देखते ही देखते बहस ने मारपीट का रूप ले लिया। बीच सड़क पर हाथापाई, पथराव और शोर-शराबा। आसपास खड़े लोग तमाशबीन बने रहे, और कुछ ने अपना कर्तव्य निभाया—मोबाइल निकाला, वीडियो बनाया, सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। कुछ ही देर में “कानून के साये में” चल रहा यह दंगल वायरल हो गया।
वीडियो में साफ दिख रहा है कि छात्र एक-दूसरे पर टूट पड़े हैं। यह सब उस इलाके में हुआ जहां पुलिस की मौजूदगी पर सवाल उठाना आम तौर पर मुश्किल माना जाता है। लेकिन यहां तो घटना थाने के सामने ही हो गई—मानो युवाओं ने सोचा हो कि कानून को लाइव डेमो दे दिया जाए।
सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची। दोनों पक्षों के छात्रों से पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में मामला व्यक्तिगत विवाद का बताया जा रहा है।
अब सवाल यह नहीं कि कमिश्नरेट मॉडल काम करेगा या नहीं। सवाल यह है कि क्या स्कूल के बच्चे भी “छेड़छाड़ के आरोप” को सड़क पर सुलझाने लगे हैं?
शहर में कानून का ढांचा बदल गया है, लेकिन कुछ दिमाग अब भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं। कमिश्नरेट लागू हो चुका है—अब शायद समझदारी भी लागू करने की जरूरत है।




