धमतरी,अर्जुनी। अंधेरी रात, सन्नाटा और अचानक गूंजती चीख—ग्राम भानपुरी की नींद तब टूटी, जब तीन नकाबपोश परछाइयों की तरह एक घर में दाखिल हुए। लक्ष्य साफ था—लाखों का खजाना। लेकिन जो होना था, उसने पूरे गांव को दहला दिया।
70 वर्षीय कृत राम साहू अपने घर में पत्नी संग सुकून की रात बिता रहे थे। तभी दरवाजा टूटा, नकाबपोश भीतर घुसे और दंपति को बंधक बना लिया। सोना-नकदी की मांग पर तनाव बढ़ा। साहू ने हिम्मत दिखाई, लेकिन यही उनकी जिंदगी की आखिरी जंग बन गई। एक धारदार हंसिया हवा में चमकी और वार ने उनकी सांसें थाम दीं। खून से लथपथ फर्श, कांपती पत्नी और डर का माहौल… मानो किसी अपराध उपन्यास का पन्ना खुल गया हो।
लुटेरे बेशर्मी से घर में रखे जेवर और नगदी समेटते रहे। चंद मिनटों में वे परछाइयों की तरह गायब हो गए। पीछे रह गया सिर्फ खामोश घर और गूंजती चीख का साया।
सुबह होते ही गांव में खौफ की लहर दौड़ गई। पुलिस, एफएसएल टीम, डॉग स्क्वाड और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट मौके पर पहुंचे। एसपी सूरज सिंह परिहार ने दावा किया—“हत्यारे जल्द पकड़े जाएंगे।” लेकिन गांव वालों की आंखों में सवाल है—आखिर उनके बीच कौन था जिसने ये खूनी खेल रचा?
यह वारदात धमतरी की सबसे बड़ी लूट-हत्या के तौर पर दर्ज हो चुकी है। हर गली, हर दरवाजे पर अब एक ही फुसफुसाहट है—“कहीं अगला निशाना हम न बन जाएं…”




