नारायणपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण-पुनर्वास नीति के तहत नारायणपुर में 40 लाख के इनामी 11 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। यह कदम राज्य सरकार की विकासात्मक पहलों और सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता है। नए सुरक्षा कैम्प, सड़क निर्माण और शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार ने स्थानीय जनता का विश्वास बढ़ाया है।
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सरकार मुख्यधारा में लौटने वाले माओवादियों के पुनरुत्थान के लिए तत्पर है, ताकि वे समाज में एक नई शुरुआत कर सकें और विकास की प्रक्रिया में योगदान दे सकें। यह नीति न केवल माओवादियों के लिए, बल्कि राज्य के समग्र विकास के लिए भी सकारात्मक संकेत है।
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दरअसल, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने कहा कि वे माओवादी विचारधारा की खोखली और अमानवीय नीतियों से निराश हो चुके थे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वरिष्ठ नक्सली कैडर भोले-भाले आदिवासियों का शोषण कर रहे थे. इसके अलावा, सुरक्षा बलों की बढ़ती उपस्थिति और सरकार द्वारा चलाए जा रहे विकास कार्यों ने भी उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया.




