नई दिल्ली। देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे से सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सोमवार को राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद छोड़ने की जानकारी दी, लेकिन इसके बाद से प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और भारतीय जनता पार्टी की ओर से चुप्पी ने राजनीतिक अटकलों को हवा दे दी है।
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कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि, देश के उपराष्ट्रपति ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय और भाजपा से जुड़े किसी भी व्यक्ति ने अब तक ना उन्हें स्वस्थ होने की शुभकामनाएं दीं और ना ही उनका धन्यवाद किया। यह चुप्पी इस बात की ओर इशारा करती है कि पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है और भाजपा भारी तनाव में है।
देश के उपराष्ट्रपति ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय और भाजपा से जुड़े किसी भी व्यक्ति ने अब तक ना उन्हें स्वस्थ होने की शुभकामनाएं दीं और ना ही उनका धन्यवाद किया।
ये चुप्पी इस बात की ओर इशारा करती है कि पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल… https://t.co/bguYIhWgoN
— Pawan Khera 🇮🇳 (@Pawankhera) July 22, 2025
विपक्ष ने जताई आशंका
धनखड़ के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस के अलावा शिवसेना (उद्धव गुट) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) जैसे विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद से अचानक हटना साधारण बात नहीं हो सकती, और इसकी पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
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बीजेपी की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं
उपराष्ट्रपति धनखड़ के इस्तीफे के बाद अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, या किसी भी वरिष्ठ भाजपा नेता ने कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। न ही धनखड़ के स्वास्थ्य की जानकारी ली गई है और न ही उनके कार्यकाल की सराहना की गई है।
सियासी रणनीति या नई जिम्मेदारी?
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या जगदीप धनखड़ की यह अचानक विदाई किसी बड़ी सियासी रणनीति का हिस्सा है, या उन्हें किसी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी की ओर अग्रसर किया जा रहा है।




