रायपुर। इंडिया टुडे–C Voter का Mood of the Nation (MOTN) सर्वे अगस्त 2025 में आया और इसने छत्तीसगढ़ की राजनीति को एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ा कर दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कामकाज से अपने गृह राज्य में 41.9% उत्तरदाता संतुष्ट दिखे। फरवरी 2025 में यही आंकड़ा 39% था। यानी, महज़ छह महीने में साय की लोकप्रियता लगभग 2.9 प्रतिशत अंक बढ़ गई।
बड़े राज्यों में साय की स्थिति
बड़े राज्यों की सूची में विष्णुदेव साय दूसरे स्थान पर हैं। उनसे आगे सिर्फ असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा हैं, जिन्हें 44.6% संतुष्टि मिली है। तीसरे स्थान पर झारखंड के हेमंत सोरेन (41.9%) और उसके बाद गुजरात के भूपेंद्र पटेल (40.7%) और यूपी के योगी आदित्यनाथ (40.4%) आते हैं।
यह परफॉर्मेंस बताता है कि साय राष्ट्रीय स्तर पर सिर्फ औसत से ऊपर नहीं हैं, बल्कि बड़े राज्यों की राजनीति में अपनी पकड़ मज़बूत कर रहे हैं।
वृद्धि क्यों मायने रखती है?
साय के लिए 2.9% की बढ़त छोटी दिख सकती है, लेकिन यह उस राज्य में हुई है जहाँ सत्ता परिवर्तन का इतिहास बहुत पुराना नहीं है। 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद बीजेपी सत्ता में लौटी थी और विष्णुदेव साय को पहली बार सीएम की कुर्सी मिली थी। शुरुआती महीनों में उनकी स्वीकार्यता का स्तर अपेक्षाकृत मध्यम रहा, लेकिन अब सर्वे यह संकेत दे रहा है कि जनता धीरे-धीरे उनके कामकाज को भरोसे के साथ देखने लगी है।
जनता की नज़र में कामकाज
विश्लेषकों के मुताबिक, साय की छवि एक सुलझे और ज़मीनी नेता की रही है।
- कृषि और ग्रामीण योजनाओं पर उनका फोकस,
- आदिवासी समुदाय के साथ संवाद,
- और केंद्र के साथ तालमेल बैठाकर राज्य में निवेश खींचने की कोशिशें — ये सब उनकी लोकप्रियता के कारक हो सकते हैं।
विपक्ष के लिए संकेत
कांग्रेस, जो हाल तक सत्ता में थी, इस बढ़ते ग्राफ को हल्के में नहीं ले सकती। पार्टी लगातार सरकार पर महंगाई और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों को लेकर हमलावर रही है, लेकिन सर्वे यह बता रहा है कि फिलहाल जनता सरकार को कामकाज के आधार पर संतोषजनक अंक दे रही है।
राष्ट्रीय राजनीति में छत्तीसगढ़ का महत्व
राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के लिए छोटे-से राज्य छत्तीसगढ़ का सियासी वजन बहुत ज़्यादा नहीं है, लेकिन राजनीतिक संदेश बड़ा है।
- साय की बढ़ती लोकप्रियता केंद्र को यह भरोसा देती है कि राज्य में सरकार स्थिर है।
- बड़े राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ का स्कोर बेहतर होना बीजेपी की गवर्नेंस ब्रांडिंग के लिए महत्वपूर्ण होगा।
विष्णुदेव साय का 41.9% संतुष्टि स्तर बताता है कि जनता धीरे-धीरे उन्हें स्वीकार कर रही है। अगर यह रुझान अगले एक साल में भी जारी रहता है, तो बीजेपी के लिए यह आने वाले चुनावों में मज़बूत आधार बन सकता है।
साय ने अब तक का सफर संतुलित और सधी हुई राजनीति से तय किया है। सवाल यही है कि क्या यह ग्राफ आगे भी ऊपर जाता रहेगा, या विपक्ष के हमले और राज्य की चुनौतियाँ इसे थाम लेंगी।




