Raipur Water Crisis: राजधानी में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। नगर निगम की Pm आवास कॉलोनी में सूखे की स्थिति देखी गई। डेढ़ साल पहले जनता को हैंडोवर किए गए नई कॉलोनी में भी सूखा पड़ा है। वहीं कुछ दिन पहले पहुंचे 5 परिवार भी पानी के लिए तरस रहे हैं। ऐसे में एक नल के भरोसे 1100 परिवार है। इस एक नल के भरोसे ही महिलाएं सुबह से शाम तक पानी ढोती रहती है।
Raipur Water Crisis: वहीं महिलाओं का कहना है कि, वे जानवरों से बद्तर स्थिति में रहने को मजबूर हैं। मजबूरी ऐसी है कि चार मंजिल ऊंचाई तक पानी चढ़ाना पड़ रहा है। सुबह से शाम तक महिलाओं का एक ही कम पानी ढोना है। मकान के बदले निगम ने धोखा दिया है। बताया गया कि पानी की कमी से लोग कॉलोनी छोड़कर जा रहे हैं। वहीं स्कूल खुलते ही मुसीबत कई गुना बढ़ेगी। जल संकट को लेकर कांग्रेस के पार्षदों ने भी मोर्चा खोला हैं।
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Raipur Water Crisis: बता दें कि जल संकट को देखते हुए कांग्रेसी पार्षदों ने अपने ही मेयर और अधिकारियों को घेरा है। वहीं राजधानी की शंकर नगर में बस्तियों में सूखे की स्थिति देखी गई। इसके साथ ही खालबाड़ा, तरुण नगर, हाटा बाजार के सामने की बस्तियों में भी सूखा है। कचना हाउसिंग बोर्ड, भाठागांव में भीषण जलसंकट की स्थिति है। कई सुलभ पानी की कमी के कारण बंद पड़ें हैं। इधर आमा सिवनी में निगम की अमृत मिशन योजना भी पूरी तरह फेल हो गई है। ढाई साल में भी अमृत मिशन योजना के नलों से पानी शुरू नहीं हो पाई है। नाम मात्र के 10 मिनट ही पानी आता है।
जल संकट से परेशान लोगों का कहना है कि, अमृत मिशन योजना की हवा निकल गई है। खोखले निकल रहे महापौर और अधिकारियों के दावे खोखले निकल रहे हैं। बस्ती के कुएं के भरोसे पेयजल व्यस्था है। पीने के पानी तक के लिए सिर फुटावल हो रहा। महिलाएं रोजी-रोटी छोड़कर पानी ढोने को मजबूर हैं।




