नई दिल्ली। लोकसभा में चल रहे शीतकालीन सत्र के दौरान गुरुवार को राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के सांसद संतोष पांडे ने खैरागढ़ स्थित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया।
सांसद पांडे ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कला एवं संगीत की अनूठी पहचान रखता है तथा इसे उसके योगदान के अनुरूप सम्मान प्राप्त होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय एशिया का प्रथम शास्त्रीय संगीत विश्वविद्यालय है, जहां कथक, भरतनाट्यम, लोक संगीत सहित अनेक पारंपरिक विधाओं की उच्चस्तरीय शिक्षा प्रदान की जाती है। विश्वविद्यालय में विदेशों से भी बड़ी संख्या में विद्यार्थी भारतीय संस्कृति की गहन शिक्षा प्राप्त करने आते हैं।
सांसद ने जोर देकर कहा कि वैश्विक ख्याति प्राप्त होने के बावजूद विश्वविद्यालय को अभी तक केंद्रीय दर्जा नहीं मिल सका है, जो इसके विकास, शोध कार्यों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई गति प्रदान कर सकता है।
उन्होंने सदन को अवगत कराया कि यह संस्थान 14 अक्टूबर 1956 को स्थापित हुआ था और तब से निरंतर भारतीय कला-संगीत की विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
पीठासीन अध्यक्ष के माध्यम से सांसद पांडे ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय घोषित करने पर गंभीरता से विचार किया जाए, ताकि इसकी अंतरराष्ट्रीय पहुंच और साख और सुदृढ़ हो सके।
सांसद की इस पहल के बाद छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक क्षेत्र में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय दर्जा मिलने से कला-संगीत शिक्षा, शोध एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए द्वार खुलेंगे तथा खैरागढ़ देश-दुनिया के सांस्कृतिक मानचित्र पर और मजबूती से उभरेगा।



