रायपुर। Integrated Child Development Services (आईसीडीएस) योजना के 50 वर्ष पूरे होने के बाद भी मानदेय और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं एक बार फिर आंदोलन की राह पर हैं। संयुक्त मंच के आह्वान पर 26 और 27 को प्रदेश के सभी 33 जिला मुख्यालयों में कामबंद हड़ताल, धरना और रैली आयोजित की जाएगी। कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
संघ पदाधिकारियों के अनुसार वर्तमान में सहायिकाओं को केंद्र सरकार से 2250 रुपये और कार्यकर्ताओं को 4500 रुपये मानदेय मिलता है। राज्यांश जोड़ने के बाद कुल मानदेय क्रमशः लगभग 5 हजार और 10 हजार रुपये तक पहुंचता है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में यह राशि परिवार के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं है। गैस सिलेंडर, खाद्यान्न, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य खर्च में लगातार वृद्धि ने आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उनसे महिला एवं बाल विकास विभाग के अलावा अन्य विभागों के सर्वे, अभियान और विभिन्न शासकीय कार्य भी लिए जाते हैं, जबकि उन्हें शासकीय कर्मचारी का दर्जा या सुविधाएं नहीं मिलतीं। न पेंशन, न ग्रेच्युटी, न समूह बीमा और न ही नियमित अवकाश की स्पष्ट व्यवस्था। बीमारी या पारिवारिक कारणों से अनुपस्थिति पर मानदेय कटौती और कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने की शिकायत भी की गई है।
संयुक्त मंच के पदाधिकारियों का कहना है कि जब सरकार को योजनाओं के क्रियान्वयन में जिम्मेदारी निभानी होती है, तब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर भरोसा किया जाता है, लेकिन सुविधाओं और अधिकारों के मामले में उन्हें उपेक्षित रखा जाता है।
मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में 9 मार्च को राजधानी रायपुर में विशाल प्रांतीय धरना-रैली और विधानसभा घेराव की चेतावनी दी गई है। संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह आंदोलन सम्मानजनक मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों में सुधार की मांग को लेकर किया जा रहा है।




