SC decision on private property: सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों की पीठ ने इस सवाल पर फैसला सुनाया कि क्या राज्य आम लोगों की भलाई की खातिर निजी संपत्ति को वितरित करने के लिए उन पर कब्जा कर सकता है। प्रधान न्यायाधीश ने सात न्यायाधीशों का बहुमत का फैसला लिखते हुए कहा कि सभी निजी संपत्तियां भौतिक संसाधन नहीं हैं और इसलिए सरकारों द्वारा इन पर कब्ज़ा नहीं किया जा सकता।
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SC decision on private property: सुप्रीम कोर्ट के बहुमत के फैसले में न्यायमूर्ति कृष्णा अय्यर के पिछले फैसले को खारिज किया गया जिसमें कहा गया था कि सभी निजी स्वामित्व वाले संसाधनों को सरकार द्वारा अधिगृहीत किया जा सकता है। बहुमत के फैसले में कहा गया कि सरकार के निजी संपत्तियों पर कब्जा कर सकने की बात कहने वाला पुराना फैसला विशेष आर्थिक, समाजवादी विचारधारा से प्रेरित था।
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SC decision on private property: सुप्रीम कोर्ट के बहुमत के फैसले के अनुसार निजी स्वामित्व वाले सभी संसाधनों को सरकार द्वारा अधिगृहीत नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार हालांकि जनता की भलाई के लिए उन संसाधनों पर दावा कर सकती है जो भौतिक हैं और समुदाय के पास हैं। न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना प्रधान न्यायाधीश से आंशिक रूप से असहमत, जबकि न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया असहमत रहे। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने अपनी असहमति में कहा कि पिछले समय में अपनाए गए विचारों के लिए उस दौर के न्यायाधीशों की निंदा नहीं की जा सकती।




