एक फ्रांसीसी मनोवैज्ञानिक एमिल कुए (Émile Coué) ने बीसवीं सदी की शुरुआत में सबकॉन्शियस थेरेपी या ऑटो सजेशन थैरेपी का विकास किया था। उनका मानना था कि व्यक्ति का अवचेतन मन (सबकॉन्शियस माइंड) हमारी सोच और स्वास्थ्य दोनों पर गहरा प्रभाव डालता है। वे मरीजों को आंखें बंद कराकर एक वाक्य को बार-बार दोहराने को कहते थे – *“हर दिन, हर तरह से, मैं बेहतर और बेहतर होता जा रहा हूं।” उनका मानना था कि जिस विचार को हम बार-बार दोहराते हैं, वह अवचेतन में घर कर लेता है और वही परिणाम देने लगता है।
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एमिल कुए की इस थैरेपी से हजारों कैंसर पीड़ितों को बिना कीमोथेरेपी के राहत मिली थी। तब जब आधुनिक इलाज जैसे कीमोथेरेपी का आविष्कार भी नहीं हुआ था। उनका सिद्धांत साफ था – *”आपका इलाज आपके भीतर है।”* यह आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
आज की दुनिया में कैंसर एक जानलेवा बीमारी बन चुका है। लेकिन अगर सकारात्मक सोच के साथ प्रॉपर इलाज मिले, तो इस बीमारी को मात देना संभव है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन खुद इसका उदाहरण हैं, जो स्किन कैंसर से उबरने के बाद अब प्रोस्टेट कैंसर जैसी गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं। लेकिन उनका आत्मविश्वास और सही इलाज उन्हें फिर से स्वस्थ बना सकता है।
कैंसर की गंभीरता और स्थिति:
हर 9 में से 1 व्यक्ति को जीवन में कैंसर का खतरा।
70% मामलों में कैंसर अंतिम स्टेज पर पता चलता है।
शुरुआती स्टेज में इलाज संभव।
तेजी से बढ़ते कैंसर:
पुरुषों में:
फूड पाइप कैंसर – 13.6%
फेफड़ों का कैंसर – 10.9%
पेट का कैंसर – 8.7%
महिलाओं में:
ब्रेस्ट कैंसर – 14.5%
सर्विक्स कैंसर – 12.2%
गॉल ब्लैडर कैंसर – 7.1%
प्रमुख कारण:
मोटापा
धूम्रपान
शराब
प्रदूषण
कीटनाशक
सनबर्न
क्या करें:
योग और मेडिटेशन अपनाएं।**
नीम, तुलसी, गिलोय, एलोवेरा, व्हीटग्रास और हल्दी का सेवन करें।**
नियमित जीवनशैली और स्वस्थ खानपान रखें।**
क्या न करें:
प्रोसेस्ड फूड
तली-भुनी चीज़ें
रेड मीट
कार्बोनेटेड ड्रिंक
प्रोस्टेट कैंसर –
पुरुषों में पाई जाने वाली यह ग्रंथि उम्र बढ़ने के साथ आकार में बढ़ जाती है और पेशाब में रुकावट पैदा करती है। कैंसर की स्थिति में यह ग्रंथि शरीर के अन्य हिस्सों तक भी फैल सकती है।
यह अक्सर एडवांस स्टेज में पकड़ में आता है।
65% मामलों में देर से पता चलने के कारण मौत होती है।
अब यह कम उम्र के पुरुषों को भी प्रभावित कर रहा है।
निष्कर्ष:
कैंसर कोई अंत नहीं, बल्कि एक चेतावनी है** — अगर समय रहते सही दिशा, सोच और उपचार चुना जाए, तो जीवन फिर से नई ऊर्जा से भर सकता है। योग, सकारात्मक सोच और नियमित जीवनशैली के साथ ही कैंसर को हराना मुमकिन है।




