नई दिल्ली। ईरान और इजरायल के बीच चल रहा संघर्ष 11वें दिन में पहुंच चुका है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इस बीच अमेरिका ने पहली बार संकेत दिया है कि वह ईरान के साथ फिर से बातचीत शुरू करने के लिए तैयार है, ताकि इस लंबे और विनाशकारी युद्ध को रोका जा सके। शनिवार रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका तनाव कम करने की दिशा में कूटनीतिक प्रयासों के लिए तैयार है। उधर, ईरान ने इजरायल पर मिसाइलों की बौछार की, जिसमें 80 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट कहा कि अब कूटनीति का समय खत्म हो गया है और देश को आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है।
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तनाव की शुरुआत 13 जून को हुई थी, जब इजरायल ने ईरान के कई ठिकानों पर अचानक हमला कर दिया था। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था कि ईरान कुछ ही दिनों में न्यूक्लियर बम बना सकता था, जो उनके देश के लिए एक बड़ा खतरा था। इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से पलटवार किया, जिससे हजारों आवासीय इमारतें और सरकारी संस्थान तबाह हो गए। इस संघर्ष में अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में अमेरिका के सैन्य हमलों की निंदा की गई है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हुए अमेरिकी हमलों और बढ़ते संघर्ष के बीच मुस्लिम देशों की चुप्पी पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा, “मुझे निराशा है कि मुस्लिम दुनिया चुप है। आज ईरान इस स्थिति में है, कल यह किसी और देश की बारी होगी।” उत्तर कोरिया ने भी अमेरिका के हमलों की तीखी आलोचना की है। सरकारी मीडिया के अनुसार, उत्तर कोरिया ने इसे संप्रभुता और क्षेत्रीय अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है। संघर्ष पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।




