रायपुर। आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों और महिलाओं के लिए भेजी गई सामग्रियों की गुणवत्ता पर उठे सवालों पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने त्वरित और सख्त रुख अपनाया। मंत्री राजवाड़े के निर्देश पर राज्य स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया। जिसमें संयुक्त संचालक (वित्त), सीएसआईडीसी और जीईसी रायपुर के तकनीकी प्रतिनिधि, संबंधित जिलों के जिला कार्यक्रम अधिकारी, सहायक संचालक (आईसीडीएस) और दो तकनीकी निरीक्षण एजेंसियों SGS इंडिया और IRCLASS सिस्टम्स के विशेषज्ञ शामिल थे। समिति ने सभी जिलों में सामग्री की गुणवत्ता का भौतिक परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट संचालनालय को सौंप दिया।
रिपोर्ट के आधार पर दोषी प्रदायकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए छह सप्लायरों नमो इंटरप्राईजेस, आयुष मेटल, अर्बन सप्लायर्स, मनीधारी सेल्स, ओरिएंटल सेल्स और सोनचिरिया कॉर्पोरेशन को जेम पोर्टल से ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। भविष्य में ये एजेंसियां किसी भी प्रकार की शासकीय सामग्री आपूर्ति नहीं कर सकेंगी। विभाग द्वारा इन सभी से घटिया सामग्री को वापस मंगाकर मानकों के अनुरूप आपूर्ति कराई गई है।
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मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई यह कार्रवाई राज्य सरकार की दृढ़ प्रशासनिक इच्छाशक्ति और पारदर्शिता का प्रमाण मानी जा रही है। मुख्यमंत्री कई बार दोहरा चुके हैं कि बच्चों, महिलाओं और गरीबों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2024-25 में कुल 23.44 करोड़ रुपये की सामग्री जेम पोर्टल के माध्यम से खरीदी गई थी। कुछ मीडिया रिपोर्टों में इसे 40 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, जिसे विभाग ने खारिज कर दिया है। विभाग के अनुसार पूरी क्रय प्रक्रिया पारदर्शी रही और सप्लाई से पहले तथा बाद में गुणवत्ता परीक्षण किया गया।
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राज्य स्तरीय समिति ने रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, जशपुर, सरगुजा और जांजगीर-चांपा जिलों में जाकर गहन निरीक्षण किया। रिपोर्ट में सामने आया कि कुछ टेबल असेंबल नहीं हुए थे, जिन्हें बाद में ठीक कराया गया। अनाज कोठी भारतीय मानकों के अनुरूप नहीं मिलने पर नमो इंटरप्राइजेस और आयुष मेटल से सामग्री बदली गई और उन्हें जेम से प्रतिबंधित किया गया। स्टील ट्रे के आकार और वजन में भिन्नता पर अर्बन सप्लायर्स, मनीधारी सेल्स व ओरिएंटल सेल्स से रिप्लेसमेंट कराया गया। तवा की गुणवत्ता कम होने पर सोनचिरैया कॉर्पोरेशन को ब्लैकलिस्ट किया गया। कढ़ाई में हल्की वजन भिन्नता छोड़कर अधिकांश मापदंडों पर सामग्री ठीक पाई गई। अन्य सामग्रियां जैसे अलमारी, कुकर, चम्मच व गिलास अधिकतर स्थानों पर मानकों के अनुरूप रहीं।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी खराब सामग्री के लिए एजेंसियों को कोई भुगतान नहीं किया गया है। विभाग की नीति के अनुसार भुगतान केवल गुणवत्ता परीक्षण के बाद ही किया जाता है, जिससे प्रदायकर्ताओं की मनमानी की कोई गुंजाइश नहीं रहती। सभी दोषपूर्ण सामग्रियों को वापस लेकर मानक सामग्री की आपूर्ति की जा चुकी है।
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महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा, बच्चों और महिलाओं से जुड़ी सेवाओं में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। हमने तत्परता और पारदर्शिता के साथ जांच पूरी कर दोषियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई की है। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है कि आंगनबाड़ी केन्द्रों तक केवल सुरक्षित, मजबूत और गुणवत्तापूर्ण सामग्री ही पहुंचे।




